गणतंत्र दिवस के मौके पर केंद्र सरकार ने वर्ष 2026 के लिए पद्म पुरस्कारों की घोषणा कर दी है। देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक, पद्म पुरस्कारों के लिए इस बार कुल 131 हस्तियों का चयन किया गया है। गृह मंत्रालय द्वारा जारी सूची में 5 पद्म विभूषण, 13 पद्म भूषण और 113 पद्म श्री पुरस्कार शामिल हैं। इस प्रतिष्ठित सूची में अभिनेता धर्मेंद्र, भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान रोहित शर्मा, मशहूर पार्श्व गायिका अलका याग्निक, उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन जैसे दिग्गज नाम शामिल हैं।
इन पुरस्कारों की घोषणा के साथ ही आम लोगों के बीच अक्सर यह चर्चा शुरू हो जाती है कि क्या इन पुरस्कारों के साथ कोई धनराशि या विशेष सरकारी सुविधाएं भी दी जाती हैं। आइए, आसान भाषा में जानते हैं कि पद्म सम्मान पाने वाले दिग्गजों को क्या-क्या मिलता है।
क्या सम्मान के साथ मिलती है नकद राशि?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पद्म पुरस्कार विजेताओं को कोई आर्थिक लाभ मिलता है? इसका सीधा जवाब है- नहीं। भारत सरकार के नियमों के मुताबिक, पद्म विभूषण, पद्म भूषण या पद्म श्री, किसी भी श्रेणी में विजेता को कोई नकद पुरस्कार (Cash Prize) नहीं दिया जाता है। यह सम्मान पूरी तरह से प्रतिष्ठा, नाम और राष्ट्र सेवा की पहचान तक सीमित है। न तो इसमें कोई एकमुश्त राशि मिलती है और न ही भविष्य के लिए कोई पेंशन या भत्ता तय किया जाता है।
रेलवे या हवाई यात्रा में छूट का सच
समाज में एक आम धारणा यह भी है कि पद्म पुरस्कार विजेताओं को रेलवे या एयर इंडिया की उड़ानों में मुफ्त यात्रा या विशेष छूट मिलती है। हकीकत यह है कि इन पुरस्कारों के साथ ऐसी कोई भी सरकारी सुविधा (Perks) नहीं जुड़ी है। विजेताओं को राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक भव्य समारोह में राष्ट्रपति के हाथों सिर्फ एक सनद (प्रमाण पत्र) और एक पदक (Medal) सौंपा जाता है। यह पदक उस व्यक्ति के असाधारण योगदान का प्रतीक होता है, न कि किसी विलासिता का साधन।
नाम के साथ नहीं लगा सकते ‘पद्म’ की उपाधि
अक्सर देखा जाता है कि लोग सम्मान पाने के बाद अपने नाम के साथ पुरस्कार का जिक्र करते हैं, लेकिन इसके लिए भी सख्त नियम हैं। संवैधानिक व्यवस्था के तहत पद्म पुरस्कार कोई ‘उपाधि’ (Title) नहीं है। इसलिए, सम्मानित व्यक्ति अपने नाम के आगे या पीछे ‘पद्म श्री’, ‘पद्म भूषण’ या ‘पद्म विभूषण’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं कर सकते।
नियमों के मुताबिक, अगर कोई विजेता अपने लेटरहेड, विजिटिंग कार्ड, निमंत्रण पत्र या किसी सार्वजनिक मंच पर अपने नाम के साथ उपसर्ग या प्रत्यय के रूप में इसका प्रयोग करता है, तो यह नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। ऐसी स्थिति में सरकार के पास यह अधिकार सुरक्षित है कि वह उस व्यक्ति से पुरस्कार वापस ले ले या रद्द कर दे।
चयन प्रक्रिया और इतिहास
गौरतलब है कि पद्म पुरस्कारों की शुरुआत 1954 में हुई थी। यह भारत रत्न के बाद देश का सबसे प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान है। यह सम्मान कला, साहित्य, खेल, विज्ञान, समाज सेवा और सिविल सर्विस जैसे क्षेत्रों में असाधारण और विशिष्ट सेवा के लिए दिया जाता है। इसके लिए नामांकन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होती है, जिसमें कोई भी भारतीय नागरिक किसी योग्य व्यक्ति के नाम की सिफारिश कर सकता है। अंतिम निर्णय प्रधानमंत्री द्वारा गठित एक विशेष समिति की सिफारिशों के आधार पर लिया जाता है।





