नई दिल्ली: ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। इस गंभीर स्थिति के बीच भारत सरकार भी पूरी तरह से अलर्ट मोड में आ गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज यानी रविवार रात 10 बजे सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। इस उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता पीएम मोदी स्वयं करेंगे।
यह बैठक मध्य पूर्व में तेजी से बदलते घटनाक्रम और वहां की सैन्य गतिविधियों के मद्देनजर बुलाई गई है। वैश्विक बाजार पर, खासकर ऊर्जा आपूर्ति पर इसके पड़ने वाले प्रभाव को लेकर सरकार बेहद गंभीर है।
बैठक के एजेंडे में क्या हो सकता है?
सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक का मुख्य फोकस मध्य पूर्व के ताजा हालात और वहां रह रहे लाखों भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना होगा। बैठक में रक्षा, विदेश और गृह मंत्रालय के शीर्ष अधिकारी भी शामिल होंगे। चर्चा के मुख्य बिंदुओं में ये शामिल हो सकते हैं:
- मध्य पूर्व में रह रहे भारतीय समुदाय की सुरक्षा के उपाय।
- ऊर्जा आपूर्ति, विशेषकर कच्चे तेल के आयात पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव का आकलन।
- क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए भारत की कूटनीतिक भूमिका।
- समुद्री व्यापार मार्गों और रणनीतिक आपूर्ति लाइनों की सुरक्षा पर मंथन।
मध्य पूर्व में जारी सैन्य संघर्ष का असर वैश्विक बाजार पर दिखने लगा है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आने की आशंका है। भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देश के लिए इन परिस्थितियों पर करीबी नजर रखना बेहद जरूरी हो गया है।
दूतावासों को मिल सकते हैं खास निर्देश
माना जा रहा है कि सीसीएस की बैठक में विदेश में स्थित भारतीय दूतावासों को हर स्थिति के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए जा सकते हैं। इसमें जरूरत पड़ने पर भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए एक व्यापक योजना तैयार रखने का निर्देश भी शामिल हो सकता है।
गौरतलब है कि भारत पारंपरिक रूप से इस क्षेत्र में एक संतुलित कूटनीतिक रुख अपनाता रहा है। भारत का हमेशा से यही प्रयास रहा है कि किसी भी संघर्ष का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए हो। आज की यह बैठक इसी व्यापक रणनीतिक तैयारी का एक हिस्सा मानी जा रही है, ताकि किसी भी आपात स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।






