पीएम मोदी कल सुबह 9 बजे देशवासियों के नाम साझा करेंगे वीडियो मैसेज

पीएम मोदी कल सुबह 9 बजे देशवासियों के नाम साझा करेंगे वीडियो मैसेज

नई दिल्ली| देश में कोरोना वायरस को लेकर राज्य से लेकर केंद्र सरकार सतर्क है| गुरूवार को पीएम नरेंद्र मोदी ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जानकारी ली| इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्विटर पर सूचना दी है कि वे शुक्रवार सुबह 9 बजे एक छोटा सा वीडियो मैसेज अपने देशवासियों के लिए जारी करेंगे।

देश में 21 दिनों का लॉकडाउन और लगातार बढ़ते कोरोना के नए मामलों के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कल यानी शुक्रवार की सुबह 9 बजे वीडियो संदेश देंगे। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इस वीडियो में क्या होगा, लेकिन माना जा रहा है कि पीएम मोदी एक बार फिर कोरोना को लेकर देशवासियों से अपील कर सकते हैं है, अब तक पीएम कई बड़े फैसले ले चुके हैं| इससे पहले, पीएम मोदी ने 24 मार्च को राष्ट्र के नाम संबोधन में कोरोना वायरस के चलते देश को 21 दिनों तक लॉकडाउन करने का ऐलान किया था। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि था कि जो जहां हैं, वहीं रहें। यह लॉकडाउन आपके भविष्य के लिए बेहद जरूरी है।

कोरोना को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश को अब तक दो बार संबोधित कर चुके हैं| पीएम ने एक बार कोरोना वायरस के चलते एक दिन का जनता कर्फ्यू का ऐलान किया था, जबकि दूसरी बार उन्होंने 21 दिनों के लॉकडाउन का ऐलान किया था| ये लॉकडाउन 14 अप्रैल तक देश में जारी रहेगा| पीएम ट्वीट के माध्यम से भी लोकडाउन को लेकर जनता से अपील कर चुके हैं|

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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