मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) अब एक नए पते पर चला गया है। भारत की आजादी के बाद 77 सालों से साउथ ब्लॉक प्रधानमंत्री के दफ्तर का पर्याय रहा है, लेकिन अब यह इतिहास बन गया है। सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के तहत बनाए गए ‘सेवा तीर्थ’ कॉम्प्लेक्स में PMO को शिफ्ट कर दिया गया है।
यह बदलाव सिर्फ एक ऑफिस शिफ्टिंग नहीं, बल्कि एक युग का अंत है। 1947 से लेकर अब तक देश के सभी प्रधानमंत्रियों ने साउथ ब्लॉक से ही कामकाज किया। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नया कार्यालय ‘सेवा तीर्थ-1’ नामक बिल्डिंग में होगा, जो आधुनिक कार्यस्थलों और औपचारिक कमरों से सुसज्जित है।
‘सेवा तीर्थ’ कॉम्प्लेक्स की खासियत
इस पूरे कॉम्प्लेक्स को एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव भी कहा जाता है, जिसका निर्माण लार्सन एंड टुब्रो (L&T) ने 1,189 करोड़ रुपये की लागत से किया है। यह 2,26,203 वर्ग फुट के विशाल क्षेत्र में फैला है। इस कॉम्प्लेक्स में कुल तीन इमारतें हैं:
- सेवा तीर्थ-1: यह प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के लिए है।
- सेवा तीर्थ-2: इसमें कैबिनेट सचिवालय पहले ही पिछले साल सितंबर में शिफ्ट हो चुका है।
- सेवा तीर्थ-3: यहां राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) का कार्यालय होगा।
साउथ और नॉर्थ ब्लॉक बनेंगे म्यूजियम
प्रधानमंत्री कार्यालय के खाली होने के बाद ऐतिहासिक साउथ और नॉर्थ ब्लॉक को एक भव्य सार्वजनिक संग्रहालय में बदला जाएगा, जिसका नाम ‘युगे युगीन भारत संग्रहालय’ होगा। इस योजना को साकार करने के लिए तकनीकी सहयोग हेतु 19 दिसंबर, 2024 को फ्रांस की एक म्यूजियम डेवलपमेंट एजेंसी के साथ समझौता भी किया गया है।
औपनिवेशिक विरासत खत्म करने का विजन
यह कदम प्रधानमंत्री मोदी के औपनिवेशिक विरासत को खत्म करने के विजन का हिस्सा माना जा रहा है। उनकी सरकार ने इससे पहले नई दिल्ली के प्रतिष्ठित राजपथ का नाम बदलकर ‘कर्तव्य पथ’ कर दिया था। इसी दिशा में केंद्र सरकार के मंत्रालयों को एक जगह लाने के लिए कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट (CCS) बिल्डिंग भी बनाई जा रही हैं, ताकि प्रशासन में दक्षता बढ़ाई जा सके। पिछले साल अगस्त में ‘कर्तव्य भवन’ का भी उद्घाटन किया गया था, जहां कई मंत्रालय पहले से ही काम कर रहे हैं।





