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आज रक्षांधन का त्यौहार, यहां जानें शुभ मुहूर्त और राखी बांधते समय बोले जानें वाले मंत्र

Written by:Rishabh Namdev
Published:
आज 9 अगस्त 2025 को रक्षाबंधन का त्योहार है। दो शुभ योग के साथ आज यह त्योहार मनाया जाएगा। राखी बांधने के लिए 7 घंटे 37 मिनट का शुभ मुहूर्त मिलेगा, जिसमें राहुकाल भी शामिल होगा। बता दें कि भद्रा रहित मुहूर्त में ही रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाता है, लेकिन इस बार भद्रा का साया नहीं है।
आज रक्षांधन का त्यौहार, यहां जानें शुभ मुहूर्त और राखी बांधते समय बोले जानें वाले मंत्र

पूरे साल रक्षाबंधन का इंतजार किया जाता है क्योंकि इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है। इस बार रक्षाबंधन 9 अगस्त को मनाया जा रहा है। आज दो शुभ योग के साथ यह त्योहार मनाया जा रहा है सर्वार्थ सिद्धि योग और शोभन योग। बता दें कि इन दोनों को ही फल देने वाला योग माना जाता है। इसमें जो भी कार्य किए जाते हैं, वह सफल होते हैं। इसके साथ ही आज श्रावण पूर्णिमा का स्नान और दान भी रक्षाबंधन के साथ ही है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस बार रक्षाबंधन के त्योहार पर भद्रा का साया नहीं है। भद्रा रहित शुभ मुहूर्त में ही बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है। शुभ मुहूर्त में ही रक्षाबंधन मनाना शास्त्रसम्मत माना जाता है।

कब रहेगा राहुकाल?

हालांकि इस बार रक्षाबंधन मुहूर्त के बीच में राहुकाल भी स्थित है। मुहूर्त पर नजर डालना जरूरी है क्योंकि राहुकाल का त्याग करके ही रक्षाबंधन मनाना चाहिए। राहुकाल को अशुभ माना गया है। अगर आप भी रक्षाबंधन के शुभ मुहूर्त की जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो बता दें कि इस बार राखी बांधने के लिए आपको 7 घंटे 37 मिनट का शुभ मुहूर्त मिलेगा। दरअसल, सावन पूर्णिमा तिथि कल 8 अगस्त को दोपहर 2:12 बजे से शुरू हो चुकी है, जो आज 9 अगस्त दोपहर 1:24 बजे तक रहेगी।

ये है राखी बांधने के शुभ मुहूर्त 

रक्षाबंधन के शुभ मुहूर्त पर नजर डाली जाए तो आज सुबह 5:45 बजे से शुभ मुहूर्त शुरू हो चुका है। आप दोपहर 1:24 बजे तक इस त्योहार को मना सकते हैं। हालांकि ध्यान देने वाली बात यह है कि इसमें राहुकाल सुबह 9:07 से 10:47 तक रहेगा, जबकि दुमुहूर्त सुबह 5:47 से 7:34 तक रहेगा। राखी बांधने का शुभ समय सुबह 7:34 से 9:06 तक रहेगा। इसके अलावा आप सुबह 10:45 से दोपहर 1:24 तक राखी बांध सकते हैं।

राखी बांधते समय और भाई को तिलक लगाते समय कुछ मंत्रों का उच्चारण जरूर करना चाहिए। यह मंत्र इस प्रकार है —

केशवानन्न्त गोविन्द बाराह पुरुषोत्तम।

पुण्यं यशस्यमायुष्यं तिलकं मे प्रसीदतु।।

कान्ति लक्ष्मीं धृतिं सौख्यं सौभाग्यमतुलं बलम्।

ददातु चन्दनं नित्यं सततं धारयाम्यहम्।

येन बद्धो बलि राजा, दानवेन्द्रो महाबल:।

तेन त्वाम् प्रतिबद्धनामि, रक्षे माचल माचल:।।

Rishabh Namdev
लेखक के बारे में
मैं ऋषभ नामदेव खेल से लेकर राजनीति तक हर तरह की खबर लिखने में सक्षम हूं। मैं जर्नलिज्म की फील्ड में पिछले 4 साल से काम कर रहा हूं। View all posts by Rishabh Namdev
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