नई दिल्ली: कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी की नागरिकता से जुड़े एक पुराने मामले में उन पर FIR दर्ज करने की मांग को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई एक बार फिर टल गई है। दिल्ली की राउज एवेन्यू सेशंस कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 13 मार्च की तारीख मुकर्रर की है। इससे पहले सोनिया गांधी इस मामले में अपना जवाब दाखिल कर चुकी हैं, जिसमें उन्होंने याचिका को राजनीति से प्रेरित बताया था।
यह मामला एक रिवीजन याचिका से संबंधित है, जिसमें एक मजिस्ट्रेट कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसने सोनिया गांधी के खिलाफ शिकायत को खारिज कर दिया था।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद विकास त्रिपाठी नाम के एक शख्स द्वारा दायर की गई शिकायत से शुरू हुआ था। त्रिपाठी ने आरोप लगाया था कि सोनिया गांधी ने भारतीय नागरिकता अधिनियम के तहत नागरिकता हासिल करने से तीन साल पहले ही कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर अपना नाम वोटर लिस्ट में शामिल करवा लिया था।
शिकायतकर्ता के अनुसार:
- सोनिया गांधी का नाम पहली बार 1980 में नई दिल्ली सीट की मतदाता सूची में जोड़ा गया।
- इसके बाद 1982 में उनका नाम लिस्ट से हटा दिया गया।
- उन्हें 1983 में भारतीय नागरिकता मिली, जिसके बाद उनका नाम फिर से वोटर लिस्ट में शामिल किया गया।
इसी आधार पर त्रिपाठी ने सोनिया गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की थी।
निचली अदालत ने खारिज कर दी थी याचिका
पिछले साल 11 सितंबर को दिल्ली की एक मजिस्ट्रेट कोर्ट ने विकास त्रिपाठी की इस शिकायत को खारिज कर दिया था। कोर्ट ने अपने फैसले में कई महत्वपूर्ण बातें कही थीं। अदालत ने कहा था कि नागरिकता से जुड़े मामलों पर फैसला करना पूरी तरह से केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि वोटर लिस्ट या चुनावी विवादों से जुड़े किसी भी मामले को देखने का अधिकार सिर्फ चुनाव आयोग को है। कोई भी क्रिमिनल कोर्ट इन मामलों में दखल नहीं दे सकता। अदालत ने यह भी पाया कि शिकायतकर्ता अपने आरोपों के समर्थन में कोई ठोस सबूत या दस्तावेज पेश करने में विफल रहा।
‘कानून का दुरुपयोग और सियासत से प्रेरित’
सोनिया गांधी ने अपने खिलाफ दायर इस अर्जी का पुरजोर विरोध किया है। कोर्ट में दाखिल अपने जवाब में उन्होंने कहा था कि यह याचिका बेबुनियाद, सियासत से प्रेरित और कानून की प्रक्रिया का सीधा दुरुपयोग है। अब सेशंस कोर्ट इस बात पर सुनवाई कर रही है कि क्या मजिस्ट्रेट कोर्ट के फैसले को पलटने का कोई आधार बनता है या नहीं। इस पर फैसला 13 मार्च को होने वाली अगली सुनवाई के बाद आ सकता है।






