
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कांग्रेस सांसद शशि थरूर के खिलाफ 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में की गई शिवलिंग पर बिच्छू टिप्पणी को लेकर चल रहे आपराधिक मानहानि मामले को बंद करने की सलाह दी। यह मामला जस्टिस एमएम सुंदरेश और एनके सिंह की बेंच के सामने आया। थरूर के वकील ने सुनवाई स्थगित करने की मांग की, जबकि शिकायतकर्ता और बीजेपी नेता राजीव बब्बर के वकील ने इसे गैर-विविध दिन में सूचीबद्ध करने की बात कही।
जस्टिस सुंदरेश ने टिप्पणी की कि इस तरह के मामलों को लेकर ज्यादा संवेदनशील होने की जरूरत नहीं है और इसे बंद कर देना चाहिए। उन्होंने कहा, “प्रशासक, राजनीतिक हस्तियां और जज एक ही समूह का हिस्सा हैं, उनकी त्वचा काफी मोटी होती है। चिंता न करें।” हालांकि, वरिष्ठ वकील पिंकी आनंद ने कहा कि मामले की सुनवाई तो करनी ही होगी। कोर्ट ने मामले को बाद की तारीख के लिए सूचीबद्ध किया और पिछले साल का अंतरिम आदेश जारी रहेगा।
मानहानि की कार्यवाही पर रोक
पिछले साल 10 सितंबर को थरूर की याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत में चल रही मानहानि की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस और शिकायतकर्ता राजीव बब्बर को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। थरूर ने दिल्ली हाई कोर्ट के 29 अगस्त के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनके खिलाफ मानहानि की कार्यवाही को रद्द करने से इनकार कर दिया गया था।
राजीव बब्बर ने दायर की शिकायत
शशि थरूर के खिलाफ यह शिकायत बीजेपी नेता राजीव बब्बर ने दायर की थी, जिन्होंने दावा किया था कि थरूर की टिप्पणी से उनकी धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। थरूर ने अक्टूबर 2018 में कहा था कि एक अज्ञात आरएसएस नेता ने मोदी की तुलना शिवलिंग पर बैठे बिच्छू से की थी, जिसे उन्होंने बेहद प्रभावशाली उपमा बताया था।
