राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य में अवैध रेत खनन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों पर नाराजगी, सरकारों को फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिए कि कि NH-44 पर मुरैना-धौलपुर सीमा के पास हाई-रिजॉल्यूशन नाइट विजन CCTV कैमरे लगाए जाएं, ताकि नदी क्षेत्र में होने वाली अवैध गतिविधियों पर 24 घंटे निगरानी रखी जा सके। कोर्ट ने इन कैमरों की लाइव फीड पुलिस और वन विभाग को उपलब्ध कराने का भी आदेश दिया।
Supreme Court

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देश की सर्वोच्च अदालत ने राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभ्यारण्य में लगातार बढ़ रहे अवैध रेत खनन को लेकर कड़ी नाराजगी जताई है, आज मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने इसपर कड़ा रुख अपनाते हुए मध्य प्रदेश , उत्तर प्रदेश और राजस्थान सरकारों को तत्काल प्रभाविकदम उठाने के निर्देश दिए हैं।

कोर्ट ने राज्य सरकारों को निर्देश देते हुए कहा कि उन्हें राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभ्यारण्य में हो रहे अवैध रेत खनन पर तत्काल प्रभावी कदम उठाने होंगे, कोर्ट ने निगरानी व्यवस्था बढ़ाने उसे और मजबूत करने तथा खाली पड़े वन रक्षकों के पदों को जल्दी भरने के निर्देश भी दिए।

मुरैना में बिना नंबर प्लेट अवैध रेत ढो रहे वाहनों पर कड़ी फटकार 

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए मुरैना जिले में बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों से अवैध रेत परिवहन  वाली मीडिया रिपोर्ट पर भी संज्ञान लिया और कड़ी फटकार लगाई, कोर्ट ने कहा पहले के आदेशों के बाद भी बिना रजिस्ट्रेशन नंबर वाले वाहनों से अवैध रेत ढुलाई की बात सही है तो इसका मतलब है कि अधिकारियों ने अदालत में गलत हलफनामा दाखिल किया है।

सिर्फ ड्राइवर नहीं, मालिकों, ठेकेदारों पर भी हो कार्रवाई

सुप्रीम कोर्ट ने अवैध रेत खनन रोकने के लिए सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए अदालत ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए, कोर्ट ने तीनों राज्यों को प्रभावित होने वाले क्षेत्रों में सीसी टीवी कैमरे, कंट्रोल सेंटर और  मॉनिटरिंग सिस्टम लगाने के निर्देश दिए, कोर्ट ने बिना रजिस्ट्रेशन अवैध रेत परिवहन में लगे वाहनों को जब्त कर उनके खलाफ क़ानूनी कार्रवाई करें, कोर्ट ने कहा केवल ड्राइवर तक ही कार्रवाई सीमित नहीं रहनी चाहिये, वाहन मालिक, ठेकेदार और अन्य लोगों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए

इसलिए खास है राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य 

राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में फैला है, करीब 5400 वर्ग किलोमीटर का ये संरक्षित क्षेत्र दुर्लभ घड़ियाल, गंगा डॉल्फिन और रेड क्राउन रूफ टर्टल जैसे संकटग्रस्त जीवों का घर माना जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने इस क्षेत्र में लगातार बढ़ रहे अवैध रेत खनन को वन्य जीवों और पर्यावरण के खतरा कहा है। इसी को देखते हुए अदालत ने तीनों राज्यों को सख्त और समन्वित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

Atul Saxena
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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