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“यादव जी की लव स्टोरी” पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर: नहीं बदलेगा फिल्म का टाइटल, अदालत ने याचिका खारिज की

Written by:Shruty Kushwaha
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अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी फिल्म के नाम पर सिर्फ आशंकाओं के आधार पर रोक नहीं लगाई जा सकती। साथ ही ये भी कहा कि “यादव जी की लव स्टोरी” शीर्षक में यादव समुदाय को लेकर कोई अपमानजनक संकेत नहीं है, इसलिए फिल्म अपनी तय तारीख पर रिलीज हो सकेगी। टाइटल को लेकर उठे विवाद और विरोध के बावजूद अदालत ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को प्राथमिकता दी।
“यादव जी की लव स्टोरी” पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर: नहीं बदलेगा फिल्म का टाइटल, अदालत ने याचिका खारिज की

Supreme Court of India

सुप्रीम कोर्ट ने आने वाली फिल्म “यादव जी की लव स्टोरी” का शीर्षक बदलने और रिलीज पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा जताई गई आशंकाएं आधारहीन हैं और फिल्म के शीर्षक में किसी समुदाय को अपमानित करने जैसा कोई स्पष्ट तत्व नहीं है।

यह फिल्म 27 फरवरी रिलीज होने वाली है। रिलीज से पहले ही शीर्षक और स्टोरी को लेकर कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन हो चुके हैं। फिल्म एक प्रेम कहानी है और इसके टाइटल को लेकर हुए विवाद के बाद ये रिलीज से पहले ही चर्चाओं में आ गई है। कुछ जगहों पर निर्माता, निर्देशक और कलाकारों के खिलाफ शिकायतें भी दर्ज कराई गईं। फिल्म का विरोध खासकर उत्तर प्रदेश में शुरू हुआ था जहां कुछ संगठनों ने आरोप लगाया कि फिल्म यादव समुदाय की छवि गलत तरीके से प्रस्तुत करती है।

फिल्म का शीर्षक बदलने के लिए सुप्रीम कोर्ट में लगाई थी याचिका

याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कहा था कि फिल्म का नाम “यादव जी की लव स्टोरी” एक विशेष जाति को सीधे तौर पर फिल्म की कहानी से जोड़ता है, जिससे समुदाय की छवि खराब हो सकती है। याचिका में फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने और शीर्षक बदलने का निर्देश देने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि फिल्म का नाम और कथानक जातिगत तनाव पैदा कर सकता है और सामाजिक सद्भाव प्रभावित हो सकता है।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी 

सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म का शीर्षक बदलने और रिलीज पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा जताई गई आशंकाएं आधारहीन हैं और फिल्म के शीर्षक में किसी समुदाय को अपमानित करने जैसा कोई स्पष्ट तत्व नहीं है। सुप्रीम कोर्ट में याचिका की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि फिल्म के शीर्षक में यादव समुदाय के खिलाफ कोई अपमानजनक विशेषण या नकारात्मक शब्द नहीं जोड़ा गया है। इसलिए सिर्फ आशंका के आधार पर फिल्म या शीर्षक पर रोक लगाने का कोई संवैधानिक आधार नहीं बनता।

अदालत ने माना कि संविधान के अनुच्छेद 19(2) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाने का औचित्य तभी बनता है जब स्पष्ट रूप से समुदाय के खिलाफ अपमानजनक या भड़काऊ सामग्री हो, जो इस मामले में नहीं पाई गई। अदालत ने अपने पहले के एक मामले “घूसखोर पंडित” के विवाद से इसे अलग बताते हुए कहा कि वहां “घूसखोर” शब्द सीधे तौर पर एक नकारात्मक विशेषण था, जबकि “यादव जी की लव स्टोरी” में ऐसा कोई शब्द नहीं है।

फिल्म के शीर्षक को लेकर विवाद की स्थिति

फिल्म का विरोध खासकर उत्तर प्रदेश में शुरू हुआ था जहां कुछ संगठनों ने आरोप लगाया कि फिल्म यादव समुदाय की छवि गलत तरीके से प्रस्तुत करती है। कुछ जगहों पर निर्माता, निर्देशक और कलाकारों के खिलाफ शिकायतें भी दर्ज कराई गईं।
विरोध करने वाले संगठनों का कहना था कि फिल्म में एक यादव युवती और दूसरे समुदाय के युवक की प्रेम कहानी दिखाई गई है, जिसे समुदाय के लिए आपत्तिजनक बताया गया। इसे लेकर कई स्थानों पर प्रदर्शन हुए और कुछ संगठनों ने सिनेमाघरों में रिलीज रोकने की चेतावनी भी दी गई है।

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Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha
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