क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध होंगे सुप्रीम कोर्ट के फैसले, CJI चंद्रचूड़ ने किया ऐलान, पीएम मोदी ने कही ये बात

Supreme Court

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले की कॉपी को हिन्दी समेत अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। जिसकी घोषणा मुख्य न्यायधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान की है। चीफ जस्टिस के इस फैसले की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी खूब प्रशंसा की है और उन्होनें इस निर्णय का स्वागत किया है। इसका मतलब यह कि अब बहुत जल्द आमजन को अपनी सहूलियत के हिसाब SC के फैसले की कॉपी को अलग-अलग भारतीय भाषाओं में पढ़ पाएंगे। इसकी तैयारी भी शुरू हो चुकी है। आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस के जरिए यह सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी।

पीएम मोदी ने कही ये बात

पीएम मोदी ने ट्वीट करते हुए कहा कि,”हाल में आयोजित हुए एक अमरोह में माननीय CJI डीवाई चंद्रचूड़ ने क्षेत्री भाषाओं में उच्चतम न्यायालय के फैसले को क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध कराने की बात कही है। उन्होनें इसके लिए टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल की सलाह भी दी है। जो एक सराहनीय विचार, जो कई लोगों की मदद करेगा। खासकर युवाओं के लिए मददगार रहेगा।” आगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुताबिक के मुताबिक भारत में कई भाषाएं हैं, जो यहाँ की सांस्कृतिक भावनाओं को जोड़ने का काम करती है। जिसके लिए सरकार भी लगातार भारतीय भाषाओं के प्रोत्साहन का काम कर रही है। जिसके लिए इंजीनियरिंग और मेडिकल मैसे महत्वपूर्ण कोर्स को हिन्दी में उपलब्ध करवाने का निर्णय लिया गया है।

CJI ने कोर्ट की कार्यवाही के प्रसारण के लिए कहा

CJI चंद्रचूड़ के मुताबिक यह व्यवस्था नागरिकों के लिए शुरू की जा रही है। जिसके लिए काम भी चल रहा है। इसके अलावा उन्होनें सुप्रीम कोर्ट के कार्यवाही के सीधे प्रसारण की बात भी कही है। उन्होनें बार काउन्सिल ऑफ महाराष्ट्र एंड गोवा द्वारा मुंबई के दादर में आयोजित हुए कार्यकम में कहा कि उनका मिशन कोर्ट के कामकाज को और भी अधिकतम डिजिटल और तकनीकी के माध्यम से करना चाहिए।

Manisha Kumari Pandey
लेखक के बारे में
पत्रकारिता जनकल्याण का माध्यम है। एक पत्रकार का काम नई जानकारी को उजागर करना और उस जानकारी को एक संदर्भ में रखना है। ताकि उस जानकारी का इस्तेमाल मानव की स्थिति को सुधारने में हो सकें। देश और दुनिया धीरे–धीरे बदल रही है। आधुनिक जनसंपर्क का विस्तार भी हो रहा है। लेकिन एक पत्रकार का किरदार वैसा ही जैसे आजादी के पहले था। समाज के मुद्दों को समाज तक पहुंचाना। स्वयं के लाभ को न देख सेवा को प्राथमिकता देना यही पत्रकारिता है। अच्छी पत्रकारिता बेहतर दुनिया बनाने की क्षमता रखती है। इसलिए भारतीय संविधान में पत्रकारिता को चौथा स्तंभ बताया गया है। हेनरी ल्यूस ने कहा है, " प्रकाशन एक व्यवसाय है, लेकिन पत्रकारिता कभी व्यवसाय नहीं थी और आज भी नहीं है और न ही यह कोई पेशा है।" पत्रकारिता समाजसेवा है और मुझे गर्व है कि "मैं एक पत्रकार हूं।" View all posts by Manisha Kumari Pandey →
Follow Us :GoogleNews