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तमिलनाडु में सरकार गठन पर सस्पेंस बरकरार: राज्यपाल ने विजय की TVK को नहीं दिया न्योता, क्या DMK-AIADMK आएंगे साथ?

Written by:Ankita Chourdia
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तमिलनाडु में सरकार गठन का सस्पेंस गहराया हुआ है। दरअसल विजय की TVK को न्योता नहीं भेजा गया है, DMK-AIADMK के संभावित गठजोड़ से सियासी पारा चढ़ गया है।
तमिलनाडु में सरकार गठन पर सस्पेंस बरकरार: राज्यपाल ने विजय की TVK को नहीं दिया न्योता, क्या DMK-AIADMK आएंगे साथ?

तमिलनाडु की राजनीति में इस वक्त किसी फिल्मी सस्पेंस जैसी कहानी देखने को मिल रही है, जहां हर कुछ घंटों में हालात बदल रहे हैं और सरकार गठन के समीकरण नई दिशा ले रहे हैं। दरअसल राज्य में नई सरकार के गठन की तस्वीर अब तक पूरी तरह से साफ नहीं हो पाई है, जिससे राजनीतिक हलचल अपने चरम पर पहुंच गई है। सरकार बनाने को लेकर जारी असमंजस हर गुजरते पल के साथ और गहराता जा रहा है, और अब सबकी निगाहें राजभवन और प्रमुख द्रविड़ दलों पर टिकी हैं।

दरअसल अभिनेता और TVK प्रमुख विजय ने गुरुवार को दूसरी बार राज्यपाल से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान विजय ने खुद को राज्य की सबसे बड़ी एकल पार्टी का नेता बताते हुए सरकार बनाने का न्योता देने की मांग की। हालांकि, सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, राज्यपाल ने साफ कर दिया कि फिलहाल उनके पास सरकार बनाने के लिए आवश्यक 118 विधायकों का समर्थन नहीं है। इसी वजह से उन्हें बहुमत साबित करने लायक समर्थन जुटाकर दोबारा आने को कहा गया है, जिससे TVK खेमे में बेचैनी साफ देखी जा सकती है।

AIADMK और DMK ने बुलाई बैठक

दरअसल राज्यपाल के इस रुख के बाद तमिलनाडु की राजनीति में सियासी हलचल और भी तेज हो गई है। एक तरफ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) ने अपने विधायक दल की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई, वहीं दूसरी ओर अन्नाद्रमुक (AIADMK) के विधायकों की एक अहम बैठक पुडुचेरी के एक रिसॉर्ट में आयोजित की गई। इन दोनों बैठकों ने राज्य की सियासत में नई अटकलों को जन्म दे दिया है।

DMK की ओर से एक बड़ा बयान

डीएमके की बैठक के बाद पार्टी की ओर से एक बड़ा बयान सामने आया, जिसमें कहा गया कि जनता ने उन्हें विपक्ष में बैठने का जनादेश दिया है। हालांकि, पार्टी ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर राजनीतिक परिस्थितियों के चलते कोई बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला लेना पड़ा, तो पार्टी अध्यक्ष एमके स्टालिन को उसका पूरा अधिकार होगा। डीएमके के इस बयान ने राज्य की राजनीति में नई अटकलों को जन्म दे दिया है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेजी से फैल गई है कि कहीं डीएमके और अन्नाद्रमुक किसी रणनीतिक समझौते या गठबंधन की ओर तो नहीं बढ़ रहे हैं, ताकि विजय की पार्टी को सत्ता से दूर रखा जा सके।

AIADMK ने विधायकों से एकजुट रहने की अपील की

उधर, पुडुचेरी के रिसॉर्ट में हुई बैठक के बाद अन्नाद्रमुक महासचिव ने पार्टी विधायकों से एकजुट रहने की अपील की। सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने विधायकों से कहा कि जल्द ही कोई ‘अच्छी खबर’ मिलेगी। इस बयान के बाद सत्ता समीकरणों को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं, और संभावित गठजोड़ की अटकलें और पुख्ता होती दिख रही हैं। द्रविड़ दलों के बीच किसी बड़े राजनीतिक फैसले की संभावना ने TVK खेमे की चिंताएं बढ़ा दी हैं।

राज्यपाल की ओर से सरकार गठन में हो रही देरी और द्रविड़ दलों के बदलते संकेतों के बीच TVK खेमे में बेचैनी बढ़ती दिखाई दे रही है। पार्टी सूत्रों का दावा है कि अगर DMK और AIADMK अपने सहयोगी दलों के साथ मिलकर सरकार बनाने की कोशिश करते हैं, तो TVK के सभी विधायक सामूहिक इस्तीफा दे सकते हैं। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषक इसे TVK की ओर से दबाव बनाने की एक रणनीति भी मान रहे हैं, ताकि वे अपनी स्थिति मजबूत कर सकें।

Ankita Chourdia
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