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ममता बनर्जी के विधायक के बगावती तेवर, कहा- 15 दिन का समय है, बात नहीं बनी तो नई पार्टी बनाऊंगा

Written by:Mini Pandey
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टीएमसी के राज्य उपाध्यक्ष जॉयप्रकाश मजुमदार ने कहा, "अगर वह नई पार्टी बनाना चाहते हैं तो कोई रोक नहीं है, लेकिन पहले उन्हें इस्तीफा देना होगा। पार्टी को उनकी समय सीमा से कोई फर्क नहीं पड़ता।"
ममता बनर्जी के विधायक के बगावती तेवर, कहा- 15 दिन का समय है, बात नहीं बनी तो नई पार्टी बनाऊंगा

तृणमूल कांग्रेस के विधायक हुमायूं कबीर ने 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले बगावती तेवर अपनाते हुए पार्टी को अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने कहा कि अगर टीएमसी 15 अगस्त तक मुर्शिदाबाद जिला नेतृत्व में सुधार नहीं करती तो वह एक नई राजनीतिक पार्टी बनाएंगे। कबीर ने दावा किया कि मुर्शिदाबाद, मालदा, उत्तर दिनाजपुर और नदिया व दक्षिण दिनाजपुर के कुछ हिस्सों में अल्पसंख्यक और कुछ हिंदू समुदाय के लोग उन्हें वैकल्पिक रास्ता अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनकी इस धमकी से टीएमसी की अल्पसंख्यक वोट बैंक में सेंध लग सकती है।

कबीर, जो पहले कांग्रेस और बीजेपी में रह चुके हैं, ने कहा कि उनकी नई पार्टी 1 जनवरी 2026 को आधिकारिक रूप से लॉन्च होगी और बंगाल में 50-52 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, खासकर अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में। उन्होंने दावा किया कि अगर वह यह कदम उठाते हैं तो न केवल वह अपनी सीट जीतेंगे बल्कि उनके कई सहयोगी भी जीत हासिल करेंगे। कबीर ने संकेत दिया कि 2026 में अगर परिणाम खंडित होते हैं तो वह ममता बनर्जी के साथ मजबूत स्थिति से सौदेबाजी करेंगे। टीएमसी ने उनके इस अल्टीमेटम को नाटक करार देते हुए कहा कि कबीर को पहले ही कई बार पार्टी अनुशासन तोड़ने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया जा चुका है।

कोई फर्क नहीं पड़ता, किसने कहा

टीएमसी के राज्य उपाध्यक्ष जॉयप्रकाश मजुमदार ने कहा, “अगर वह नई पार्टी बनाना चाहते हैं तो कोई रोक नहीं है, लेकिन पहले उन्हें इस्तीफा देना होगा। पार्टी को उनकी समय सीमा से कोई फर्क नहीं पड़ता।” विपक्ष ने कबीर की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए। बीजेपी नेता राहुल सिन्हा ने कहा कि कबीर के अपने क्षेत्र में ही पुतले जलाए जा रहे हैं और उनके पोस्टरों पर जूते फेंके जा रहे हैं। सीपीआई (एम) नेता सुजान चक्रवर्ती ने कबीर के बार-बार दल बदलने की आलोचना करते हुए इसे अवसरवादी सौदेबाजी करार दिया।

कबीर की यह रणनीति जोखिम भरी

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कबीर की यह रणनीति जोखिम भरी लेकिन फायदेमंद हो सकती है। उनकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह मुर्शिदाबाद में संगठनात्मक ताकत जुटा पाते हैं या नहीं। हालांकि, उनका बार-बार दल बदलना उनकी विश्वसनीयता के लिए चुनौती बन सकता है। कबीर ने स्पष्ट किया कि उनका ममता बनर्जी या अभिषेक बनर्जी से कोई व्यक्तिगत विरोध नहीं है बल्कि उनकी लड़ाई जिला स्तर के भ्रष्ट और तानाशाही नेताओं से है।

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