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सोमवार को लोकसभा में वंदे मातरम पर चर्चा, संबित पात्रा ने कहा- सोनिया गांधी कर सकती हैं इसकी बुराई

Written by:Shyam Dwivedi
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लोकसभा में सोमवार का दिन काफी विशेष होने वाला है क्योंकि वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। वहीं राज्यसभा में मंगलवार 9 दिसंबर को अमित शाह चर्चा शुरू करेंगे। उच्च सदन के नेता जेपी नड्डा भी इस बहस में हिस्सा लेंगे।
सोमवार को लोकसभा में वंदे मातरम पर चर्चा, संबित पात्रा ने कहा- सोनिया गांधी कर सकती हैं इसकी बुराई

लोकसभा और राज्यसभा में शीतकालीन सत्र चल रहा है। लोकसभा में सोमवार का दिन काफी विशेष होने वाला है क्योंकि वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अपना भाषण देंगे और विभिन्न दलों के सांसद अपने विचार रखेंगे। सदन की कार्यवाही में 10 घंटे का विशेष समय निर्धारित किया गया है।

वहीं राज्यसभा में मंगलवार 9 दिसंबर को अमित शाह चर्चा शुरू करेंगे। उच्च सदन के नेता जेपी नड्डा भी इस बहस में हिस्सा लेंगे। सरकार ने बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा रचित इस राष्ट्रगीत के 150 साल पूरे होने पर देशव्यापी जश्न मनाने का फैसला किया है। संसद के शीतकालीन सत्र में यह बहस राजनीतिक और सांस्कृतिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

वंदे मातरम पर चर्चा से पहले संबित पात्रा का सोनिया गांधी पर तंज

दोनों ही सदनों में वंदे मातरम पर चर्चा से पहले बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और सांसद संबित पात्रा का बयान सामने आया है। सांसद ने कहा कि सोनिया गांधी ने कहा था कि भाजपा इतिहास को फिर से लिखने की कोशिश कर रही है। मैं कहूंगा कि भाजपा इतिहास को फिर से लिखने की कोशिश नहीं कर रही है, बल्कि इतिहास को सुधार रही है और उन लोगों को उनका हक दे रही है, जिन्होंने सच में इस देश की आजादी और देश के अलग-अलग पहलुओं में योगदान दिया है।

उन्होंंने कहा कि मैं भाजपा सरकार और प्रधानमंत्री को धन्यवाद देना चाहता हूं कि उन्होंने नेहरू-गांधी राजनीति में किनारे किए गए खोए हुए हीरो को सामने लाया और उनकी असलियत साबित की। जब सरदार@150 कार्यक्रम किया गया और पूरे देश में सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती मनाई, जिसमें पूरे भारत में एकता मार्च निकाला गया और उनके योगदान पर बहस हुई। उनका नाम सालों तक दबा दिया गया था।

इसी तरह हमारा राष्टीय गीत वंदे मातरम, जिसे बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 7 नवंबर, 1875 को लिखा था, उसके 150 साल पूरे हुए। आज पूरे देश में जश्न इसके महत्व, इतिहास को याद करते हैं, और हमें हमारे बुनियादी बलिदानों से फिर से जोड़ते हैं।

वंदे मातरम पर चर्चा को लेकर बोले सांसद संबित पात्रा

बीजेपी सांसद ने कहा कि जब हमारे पुरखों ने वंदे मातरम का नारा लगाते हुए इस देश के लिए खून बहाया था। मुझे पता है कि सोनिया गांधी इसकी बुराई कर सकती हैं, लेकिन सच तो सच है। सचिव भट्टाचार्य की किताब से नेहरू के बारे में तीन बातें ध्यान देने लायक हैं: पहला, उन्होंने इसका इंग्लिश वर्जन पढ़ा।

CWC मीटिंग से छह दिन पहले आनंद मठ, भले ही उस समय इसका भारतीय भाषाओं में अनुवाद किया गया था। अगर किसी को वंदे मातरम समझने के लिए डिक्शनरी की जरूरत है, तो वह विरासत निर्माता नहीं है। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम मुसलमानों को परेशान करेगा। यह नेहरू का सेक्युलरिज्म का झूठा एहसास था। सोमवार को जब संसद में वंदे मातरम पर चर्चा होगी, तो मुझे लगता है कि नेहरू की परंपरा फिर से बहस, चर्चा का विषय बनेगी और शायद सामने आ जाए।

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Shyam Dwivedi
लेखक के बारे में
पत्रकार वह व्यक्ति होता है जो समाचार, घटनाओं, और मुद्दों की जानकारी देता है, उनकी जांच करता है, और उन्हें विभिन्न माध्यमों जैसे अखबार, टीवी, रेडियो, या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर प्रस्तुत करता है। मेरा नाम श्याम बिहारी द्विवेदी है और मैं पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है। View all posts by Shyam Dwivedi
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