पश्चिम बंगाल SIR को लेकर हाई कोर्ट सख्त, अवैध OBC सर्टिफिकेट स्वीकार नहीं, सीईओ को निर्देश जारी

पश्चिम बंगाल में SIR को लेकर सियासत जारी है। इसी बीच हाई कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है। सीईओ को अवैध ओबीसी सर्टिफिकेट स्वीकार न करने का निर्देश दिया गया है। इस मामले में फैसला लेने के लिए एक सप्ताह का समय दिया है। 
west bengal SIR

पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट ने सख्त कदम उठाया है। 24 दिसंबर बुधवार को मुख्य निर्वाचन अधिकारी को एक याचिका पर विचार करने का निर्देश दिया गया है, जिसमें अवैध ओबीसी  सर्टिफिकेट को स्वीकार न करने की मांग की गई है। इतना ही नहीं इससे जुड़े तर्कसंगत आदेश पारित करने का आदेश भी दिया गया है।

याचिका के मुताबिक मई 2024 में हाई कोर्ट ने राज्य में 77 श्रेणियों के लोगों के ओबीसी प्रमाण पत्र को रद्द कर दिया था। न्यायमूर्ति कृष्ण राव ने अब सीईओ को इस मामले पर अपना रुख स्पष्ट करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही एक सप्ताह के भीतर तर्कसंगत फैसला लेने को भी कहा गया है।

याचिकाकर्ता की मांग 

याचिकाकर्ता अरिजित बख्शी ने अपनी याचिका में दावा किया है कि राज्य में मतदाता सूची के एसआईआर के लिए गणना प्रपत्र में ओबीसी प्रमाण पत्र को वैध  दस्तावेज के रूप में उल्लेख किया गया है। उनके वकील  बिल्वदल भट्टाचार्य ने कोर्ट से यह अपील की है कि चुनाव आयोग एक शुद्धि पत्र जारी करें। जिसमें यह स्पष्ट होगा कि एसआईआर में केवल वैध ओबीसी प्रमाण पत्र को ही दस्तावेज के रूप में स्वीकार किया जाएगा। वहीं इस मामले में चुनाव आयोग की ओर से उपस्थित वकील अनामिका पांडे का कहना है कि मतदाता सूची के एसआईआर की वैधता से संबंधित एक मामला कर उच्च सुप्रीम कोर्ट में भी लंबित है, इसलिए याचिका पर कोई आदेश पारित नहीं किया जा सकता।

पहले से सेवा दे रहे लोगों पर नहीं पड़ेगा असर

राज्य में 2010 से दिए गए कई वर्गों के लिए ओबीसी दर्जे को रद्द कर दिया था। यह कदम राज्य में सेवाओं और पदों में वैकेंसी के लिए इस तरह का आरक्षण कानून के प्रावधानों के अनुरूप नहीं है। हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था फैसला निरस्त किए गए वर्गों के उन नागरिकों पर नहीं लागू होगा, जो पहले से ही सेवा में है या आरक्षण का लाभ उठा चुके। न ही यह फैसला चयन प्रक्रिया में सफल हुए उम्मीदवारों पर प्रभावी होगा।

Manisha Kumari Pandey
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