विश्व शेर दिवस: जंगल के राजा के संरक्षण से जुड़ा दिन, जानिए भारत में शेरों की स्थिति और भविष्य की तस्वीर

शेर सदियों से जंगल की ताकत और जैव विविधता के प्रतीक रहे हैं। लेकिन बदलते पर्यावरण और घटते प्राकृतिक आवास ने इनके अस्तित्व के सामने बड़ी चुनौती खड़ी की है। आज का दिन शेरों की घटती वैश्विक आबादी, उनके पारिस्थितिक महत्व और संरक्षण के प्रयासों पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर है।
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World Lion Day,

आज विश्व शेर दिवस है। हर साल 10 अगस्त को ये दिन शेरों के संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने, उनके प्राकृतिक आवासों की रक्षा करने और शिकार व मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसी चुनौतियों पर वैश्विक ध्यान केंद्रित करने के उद्देश्य से मनाया जाता है।

विश्व शेर दिवस पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने वन्यजीवों के संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि शेर सिर्फ हमारी जैव विविधता का गौरव नहीं हैं, बल्कि प्रकृति के संतुलन का महत्वपूर्ण आधार भी हैं। सीएम ने कहा कि शेरों के संरक्षण के लिए किए जा रहे सतत प्रयास भारत की समृद्ध प्राकृतिक विरासत को सुरक्षित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

विश्व शेर दिवस का इतिहास 

विश्व शेर दिवस की शुरुआत वर्ष 2013 में वन्यजीव संरक्षणवादियों डेरेक जौबर्ट और बेवर्ली जौबर्ट की पहल से हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य अफ्रीका और एशिया में घटती शेरों की संख्या को लेकर वैश्विक स्तर पर जागरूकता बढ़ाना था। समय के साथ यह दिवस वन्यजीव संरक्षण से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय अभियानों में शामिल हो गया।

क्यों महत्वूर्ण हैं शेर

शेर पृथ्वी की सबसे प्रतिष्ठित वन्य प्रजातियों में से एक हैं और खाद्य श्रृंखला के शीर्ष पर स्थित होते हैं। वे वन्यजीव आबादी को संतुलित बनाए रखने में मदद करते हैं। किसी क्षेत्र में शेरों की स्वस्थ आबादी उस क्षेत्र के पारिस्थितिक तंत्र की मजबूती का संकेत मानी जाती है। शेरों की संख्या में गिरावट जैव विविधता और प्राकृतिक संतुलन दोनों के लिए चिंता का विषय है।

दुनियाभर में शेरों की आबादी

विशेषज्ञों के अनुसार, बीसवीं सदी की शुरुआत में दुनिया में लगभग दो लाख शेर थे लेकिन वर्तमान में उनकी संख्या घटकर लगभग 20 से 25 हजार के बीच रह गई है। अधिकांश शेर अफ्रीका के सवाना क्षेत्रों में पाए जाते हैं। आवासों का सिकुड़ना, अवैध शिकार और मानव हस्तक्षेप इनके अस्तित्व के लिए बड़ी चुनौतियां हैं।

भारत में शेरों की आबादी

भारत एशियाई शेरों की दुनिया में एकमात्र जंगली आबादी का प्राकृतिक आवास है। यह आबादी गुजरात के ग्रेटर गिर लैंडस्केप में पाई जाती है और अब गिर से बाहर सौराष्ट्र के कई क्षेत्रों तक इसका विस्तार हो चुका है। साल 2025 की 16वीं लायन पॉपुलेशन एस्टिमेशन के अनुसार गुजरात में शेरों की संख्या 891 है। एशियाई शेरों की यह बढ़ती आबादी भारत की प्रमुख संरक्षण सफलताओं में गिनी जाती है। वन्यजीव विशेषज्ञ लंबे समय से एशियाई शेरों के लिए दूसरा सुरक्षित आवास विकसित करने की आवश्यकता पर जोर देते रहे हैं ताकि किसी प्राकृतिक आपदा, महामारी या अन्य संकट की स्थिति में पूरी आबादी एक ही क्षेत्र पर निर्भर न रहे। इसी उद्देश्य से मध्यप्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान को संभावित पुनर्वास स्थल के रूप में विकसित किया गया था। हालांकि अब तक एशियाई शेरों का स्थानांतरण नहीं हो पाया है।

भविष्य की चुनौतियां

भारत में एशियाई शेरों की बढ़ती संख्या संरक्षण के लिए उत्साहजनक तस्वीर पेश करती है, लेकिन इनके भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए सिर्फ आबादी बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। शेरों के प्राकृतिक आवास का विस्तार, मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करना और दूसरी स्वतंत्र आबादी विकसित करना दीर्घकालिक संरक्षण के लिए अहम है। ऐसे में विश्व शेर दिवस शेरों की मौजूदा स्थिति के साथ उनके सुरक्षित भविष्य की दिशा में किए जाने वाले प्रयासों पर भी ध्यान केंद्रित करने का अवसर देता है।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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