
World Sanskrit Day
आज विश्व संस्कृत दिवस मनाया जा रहा है। संस्कृत को दुनिया की प्राचीनतम भाषाओं में से एक माना जाता है। यह भाषा सिर्फ वेदों, उपनिषदों और शास्त्रों तक सीमित नहीं रही, बल्कि भारतीय साहित्य, दर्शन, विज्ञान, गणित, आयुर्वेद और व्याकरण की समृद्ध परंपरा का आधार भी बनी। हर साल संस्कृत दिवस के अवसर पर इस गौरवशाली भाषा और इसकी विरासत को याद किया जाता है।
संस्कृत को अक्सर सिर्फ प्राचीन ग्रंथों और श्लोकों की भाषा के रूप में देखा जाता है, लेकिन इसकी कहानी इससे कहीं ज्यादा दिलचस्प है। हजारों वर्ष पुरानी यह भाषा भारतीय ज्ञान, दर्शन, साहित्य, विज्ञान और व्याकरण की समृद्ध परंपरा से जुड़ी रही है। संस्कृत की संरचना और इसके व्याकरण से जुड़ी कई ऐसी बातें हैं, जिन्हें जानकर आप भी चौंक सकते हैं।
दुनिया की सबसे व्यवस्थित भाषाओं में गिनी जाती है संस्कृत
संस्कृत का व्याकरण बेहद व्यवस्थित और नियमबद्ध माना जाता है। पाणिनि ने लगभग ढाई हजार वर्ष पहले ‘अष्टाध्यायी’ की रचना की, जिसमें संस्कृत के व्याकरण को हजारों सूत्रों के माध्यम से व्यवस्थित किया गया। इसकी तार्किक संरचना आज भी भाषाविज्ञान के अध्ययन का महत्वपूर्ण विषय है।
कंप्यूटर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए उपयुक्त भाषा
नासा के वैज्ञानिक रिक ब्रिग्स ने 1985 में अपने शोध पत्र में लिखा था कि संस्कृत दुनिया की एकमात्र ऐसी स्पष्ट (unambiguous) भाषा है जिसमें अर्थ की अस्पष्टता नहीं होती। इसकी व्याकरणिक संरचना इतनी सटीक और नियमबद्ध है कि यह नैचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग और एआई के लिए आदर्श मानी जाती है। पाणिनि की अष्टाध्यायी को आधुनिक कंप्यूटेशनल लिंग्विस्टिक्स का पूर्वरूप तक कहा जाता है।
शब्दावली का वैभव
संस्कृत में एक ही चीज के दर्जनों-सैकड़ों पर्यायवाची शब्द हैं। हाथी के लिए 100 से ज्यादा नाम, पानी के लिए 70 से अधिक शब्द, प्रेम के लिए करीब 96 पर्याय और ‘जाना’ क्रिया के लिए 100 से ज्यादा शब्द हैं। यह भाषा संयोजन (समास) और धातु से नए शब्द बनाने की असीम क्षमता रखती है। कुछ अनुमानों के अनुसार इसकी संभावित शब्दावली करोड़ों-अरबों में पहुंच सकती है।
एक शब्द के कई रूप और हर रूप का अपना अर्थ
संस्कृत में संज्ञा और क्रिया के रूप संदर्भ के अनुसार बदलते हैं। एक ही शब्द के अलग-अलग रूप उसके वाक्य में संबंध और भूमिका को स्पष्ट कर सकते हैं। यही वजह है कि संस्कृत के व्याकरण में विभक्ति, वचन और लिंग की व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण है।
संदर्भ बदलने पर अर्थ बदलने वाले शब्द
संस्कृत की शब्द-संपदा इतनी व्यापक है कि कई शब्द अलग-अलग संदर्भों में अलग अर्थ दे सकते हैं। इसी वजह से संस्कृत काव्य में श्लेष जैसे अलंकारों के जरिए एक ही शब्द से कई अर्थ पैदा करने की परंपरा विकसित हुई।
जहां आज भी रोजमर्रा की बातचीत संस्कृत में होती है
कर्नाटक के शिमोगा जिले का मत्तूर (और पास का होसहल्ली) गांव दुनिया का ऐसा अनोखा स्थान है जहां बच्चे, दुकानदार, किसान सब संस्कृत में बात करते हैं। यह गांव संस्कृत को जीवंत रखने का जीवंत उदाहरण है। उत्तराखंड में संस्कृत राज्य की दूसरी आधिकारिक भाषा भी है।
मौखिक परंपरा का इतिहास
लिखने से सदियों पहले वेद और अन्य ग्रंथ सिर्फ याद करके संरक्षित किए गए। विशेष लय, स्वर और उच्चारण नियमों की वजह से हजारों साल बाद भी पाठ लगभग जस के तस बचे रहे। यह मानव इतिहास की सबसे सफल मौखिक संरक्षण प्रणालियों में से एक है।
सिर्फ धर्म नहीं, विज्ञान की भाषा भी
आर्यभट्ट, भास्कराचार्य, सुश्रुत, चरक जैसे महान विद्वानों ने गणित, खगोल, आयुर्वेद और शल्य चिकित्सा के ग्रंथ संस्कृत में ही लिखे। साइन, कोसाइन, व्यास, परिधि जैसे कई गणितीय शब्दों की जड़ें संस्कृत में मिलती हैं।
अन्य भाषाओं पर गहरा प्रभाव
अंग्रेजी में गुरु, योग, कर्म, अवतार, निर्वाण जैसे शब्द संस्कृत से आए। कई यूरोपीय भाषाओं और भारतीय भाषाओं (हिंदी, बंगाली, मराठी, गुजराती आदि) की जड़ें संस्कृत से जुड़ी हैं। सर विलियम जोन्स ने 18वीं शताब्दी में ही संस्कृत, ग्रीक और लैटिन की समानता बताकर तुलनात्मक भाषाविज्ञान की नींव रखी थी।
दुनिया का एकमात्र संस्कृत अखबार
मैसूर से प्रकाशित “सुधर्मा” दुनिया का एकमात्र संस्कृत दैनिक अखबार है, जो दशकों से लगातार निकल रहा है।
(डिस्क्लेमर: ये लेख विभिन्न स्त्रोतों से प्राप्त जानकारियों पर आधारित है। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं)
पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

