सिंगोली मगरमच्छ रेस्क्यू अभियान में वन विभाग ने धनगांव और कदवासा गांव से दो विशालकाय मगरमच्छों को सुरक्षित पकड़कर चंबल नदी में छोड़ने की तैयारी की। दरअसल लगातार कई दिनों तक चले अभियान के बाद इलाके में फैली दहशत खत्म हुई। वहीं अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि मगरमच्छ दिखने पर खुद जोखिम न उठाएं और तुरंत वन विभाग को सूचना दें।
दरअसल वन विभाग के मुताबिक पहला मगरमच्छ ग्राम धनगांव के बस स्टैंड के पास स्थित तलाई में देखा गया था। सूचना मिलते ही रतनगढ़ वन परिक्षेत्र की टीम मौके पर पहुंच गई और लगातार तीन दिनों तक निगरानी और रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया।
बार-बार पानी में छिप रहा था मगरमच्छ
मगरमच्छ के बार-बार पानी में छिप जाने के कारण अभियान चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन टीम ने धैर्य के साथ काम करते हुए उसे सुरक्षित पकड़ लिया। वहीं दूसरे मामले में ग्राम कदवासा के बालापुरा नई आबादी स्थित तालाब में एक और विशालकाय मगरमच्छ दिखाई दिया। यहां करीब पांच घंटे तक चले अभियान के बाद उसे भी सुरक्षित पकड़ लिया गया। दोनों मामलों में किसी ग्रामीण या वनकर्मी को नुकसान नहीं पहुंचा, जो इस अभियान की बड़ी सफलता मानी जा रही है।
नदी या संरक्षित जलक्षेत्र में छोड़ देता है वन विभाग?
अक्सर बारिश के मौसम में जलस्तर बढ़ने के कारण नए जलाशयों या गांवों के तालाबों तक मगरमच्छ पहुंच जाते हैं। वहीं ऐसे मामलों में वन विभाग की ओर से सबसे पहले इलाके को सुरक्षित किया जाता है ताकि लोग जानवर के पास न जाएं। इसके बाद प्रशिक्षित वनकर्मी विशेष जाल, रस्सियों और सुरक्षा उपकरणों की मदद से मगरमच्छ को नियंत्रित करते हैं। रेस्क्यू के दौरान जानवर को कम से कम तनाव हो, इसका भी पूरा ध्यान रखा जाता है। पकड़ने के बाद उसका स्वास्थ्य परीक्षण किया जाता है और फिर उसे उसके प्राकृतिक आवास, जैसे नदी या संरक्षित जलक्षेत्र में छोड़ा जाता है।






