
Maha Kumbh Mela 2025: प्रयागराज में 13 जनवरी 2025 से 26 फरवरी 2025 तक आयोजित होने वाले महा कुंभ को इस बार ग्रीन महा कुंभ बनाने का प्रयास किया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुसार महा कुंभ को स्वच्छ महा कुंभ, ग्रीन महा कुंभ बनाने के लिए मेला प्राधिकरण ने मेला क्षेत्र को प्लास्टिक मुक्त रखने के प्रयास शुरू कर दिए हैं वहीं नगर निगम प्रयागराज भी पूरे शहर को प्लास्टिक फ्री रखने को लेकर अभियान चला रहा है, इसमें अब मध्य प्रदेश भी भागीदार बन रहा है।
प्रयागराज महा कुंभ को प्लास्टिक मुक्त बनाने के संकल्प के लिए मध्य प्रदेश का नीमच जिला भी सहभागी बन रहा है। जिले में सामाजिक संगठनों ने एक थाली, एक थैला अभियान चलाया। इसके अंतर्गत जिले से 4100 स्टील थाली व 4100 थैला संग्रहित किए। इनकी पूजा-अर्चना कर पैकिंग की गई। अब ट्रांसपोर्ट से प्रयागराज पहुंचाया जा रहा है। अभियान में सभी संगठनों का अमूल्य योगदान रहा है।
इन सभी ने दिया अहम् योगदान
नीमच के सीए एसोसिएशन संगठन द्वारा 101, भारत विकास परिषद 251, नीमच सिटी जैन मंदिर समाज 50, जैन स्थानक समाज 50, भारत विकास परिषद विवेकानंद शाखा 89, मुक्तिधाम सर्वसमाज नीमच सिटी (रावण रूंडी), सीताराम जाजू कन्या महाविद्यालय 300, विवेकानंद बाल कल्याण समिति (शिशु मंदिर एसएसवीएम) 200 एवं नगर की व्यवसायी शाखा के स्वयंसेवकों द्वारा 150 थाली और थैले जुटाने में अहम् योगदान दिया है।
मालवा प्रांत केंद्र से प्रयागराज पहुंचाया जायेगा
4100 थाली 4100 थैले को राम मंदिर जाजू बिल्डिंग में पुजारी जीवन तिवारी ने विधि-विधान से भगवान की आरती कर इनकी पूजा-अर्चना की। इसके बाद नीमच से मालवा प्रांत के केंद्र इंदौर ट्रांसपोर्ट द्वारा पहुंचाई। मालवा प्रांत केंद्र से सभी को प्रयागराज पहुंचाया जायेगा। कार्यक्रम में कई समाजजन ने सहयोग किया।
40 करोड़ श्रद्धालु सम्मिलित होने का अनुमान
कार्यक्रम आयोजकों के अनुसार प्रयागराज में जो महा कुंभ होने जा रहा है इसमें 45 दिनों में अनुमानित 40 करोड़ श्रद्धालु सम्मिलित होने वाले हैं। हम कल्पना करें कि एक तीर्थ यात्री तीन दिन भी वहां रुकता है, तीन दिन में 6 बार भोजन, दो से तीन बार चाय नाश्ता करेगा। ऐसे में 40 करोड़ तीर्थ यात्रियों के भोजन आदि में कितना पॉलिथिन, डिस्पोजल, कागज लग जाएगा। जो कचरा बनकर तीर्थ नगरी प्रयागराज को प्रदूषित कर सकता है। महाकुंभ में 40 हजार टन कचरा उत्सर्जित होने का अनुमान है। शासन-प्रशासन अपने स्तर पर कचरा निस्तारण की व्यवस्था करेगा। इसलिए पर्यावरण को बचाने के लिए ये पहल की जा रही है।
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नीमच से कमलेश सारडा की रिपोर्ट
पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

