नीमच जिले में केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर अब सख्ती दिखाई देने लगी है। जल जीवन मिशन में सामने आई गंभीर लापरवाहियों ने जनप्रतिनिधियों की चिंता बढ़ा दी है। इसी कड़ी में सोमवार को आयोजित जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति की बैठक बेहद अहम रही। बैठक की अध्यक्षता सांसद सुधीर गुप्ता ने की, जिसमें जिले के सभी प्रमुख विभागों की प्रगति की बारीकी से समीक्षा की गई। बैठक का माहौल सामान्य औपचारिकता से अलग था। सांसद ने साफ शब्दों में कहा कि सरकारी योजनाएं कागजों में नहीं, बल्कि जमीन पर दिखनी चाहिए। खासकर ग्रामीण इलाकों में शुद्ध पेयजल पहुंचाने वाली जल जीवन मिशन योजना में जो कमियां सामने आई हैं, वे चिंता का विषय हैं और इन्हें अब नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
जल जीवन मिशन पर असंतोष
बैठक के दौरान जल जीवन मिशन की प्रगति रिपोर्ट सामने आते ही सांसद ने असंतोष जाहिर किया। हमने पाया कि कई गांवों में पाइपलाइन बिछाने, जल आपूर्ति शुरू करने और गुणवत्ता जांच को लेकर गंभीर खामियां हैं। सांसद ने कहा कि यह योजना सीधे आम जनता, खासकर ग्रामीण परिवारों से जुड़ी है, इसलिए इसमें किसी भी तरह की ढिलाई स्वीकार नहीं की जा सकती।
इसी कारण दिशा समिति के माध्यम से प्रदेश स्तर की तकनीकी और प्रशासनिक टीम को नीमच बुलाने के निर्देश दिए गए। अलग से समीक्षा बैठक आयोजित कर यह तय किया जाएगा कि कहां लापरवाही हुई, जिम्मेदार कौन है और सुधार कैसे होगा। सांसद का साफ संदेश था कि अब केवल फाइलों में प्रगति दिखाने से काम नहीं चलेगा, जमीन पर नतीजे दिखने चाहिए।
थर्ड पार्टी एजेंसी की गैरहाजिरी पर नाराजगी
हमारी जानकारी में आया कि जल जीवन मिशन की निगरानी करने वाली थर्ड पार्टी एजेंसी का प्रमुख बैठक में मौजूद नहीं था। सांसद ने इसे गंभीर लापरवाही माना। उन्होंने बैठक के दौरान ही संबंधित अधिकारी से फोन पर बात की और भविष्य में इस तरह की गैरहाजिरी दोहराने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी।
यह साफ संकेत था कि योजनाओं की मॉनिटरिंग में कोई भी एजेंसी अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती। सांसद ने कहा कि अगर निगरानी सही नहीं होगी, तो योजना का लाभ जनता तक नहीं पहुंचेगा, और इसकी कीमत आम लोग चुकाएंगे।
बिना अनुमति सड़क खुदाई पर कड़ा रुख
बैठक में एक और गंभीर मुद्दा सामने आया। BSNL, लोक निर्माण विभाग (PWD), प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) और मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम (MPRDC) सहित कुछ विभागों द्वारा आपसी समन्वय के बिना सड़कों की खुदाई की गई। यह खुदाई जल निगम के कार्यों के दौरान हुई, जिससे कई जगह सड़कें खराब हुईं और दुर्घटनाओं की स्थिति बनी। सांसद ने इसे गंभीर प्रशासनिक चूक बताया। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि आगे से किसी भी सड़क की खुदाई पूर्व अनुमति और आपसी सहमति के बिना न की जाए। साथ ही जिन एजेंसियों की वजह से सड़कें खराब हुईं और जनता को परेशानी हुई, उनके खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया।
सब्सिडी लोन योजनाओं में सरल प्रक्रिया के निर्देश
आदिम जाति विभाग की सब्सिडी लोन योजनाओं को लेकर भी बैठक में चर्चा हुई। सांसद ने कहा कि कई बार जटिल प्रक्रिया के कारण जरूरतमंद हितग्राही योजना का लाभ नहीं ले पाते। इसलिए अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे खुद इस प्रक्रिया की निगरानी करें और हितग्राहियों को अंत तक सहयोग दें, जब तक कि राशि उनके बैंक खातों में जमा न हो जाए। बैंकों को भी साफ संदेश दिया गया कि वे लाभार्थियों को अनावश्यक रूप से परेशान न करें। हमारा उद्देश्य यही है कि सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे और आसानी से जनता तक पहुंचे।
भारतनेट परियोजना और डिजिटल कनेक्टिविटी
दूरसंचार विभाग को भारतनेट परियोजना के तहत पंचायतों में किए गए कार्यों का भौतिक सत्यापन कराने के निर्देश दिए गए। कई जगह केबल और लाइनें क्षतिग्रस्त होने की शिकायतें सामने आई थीं। सांसद ने कहा कि जिन एजेंसियों की वजह से नुकसान हुआ है, उन्हें नोटिस जारी कर जल्द सुधार कार्य कराया जाए। यह कदम ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट और डिजिटल सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
नयागांव फाटक पर लंबे समय से प्रस्तावित रेलवे ओवरब्रिज के निर्माण को लेकर भी सांसद ने सख्ती दिखाई। उन्होंने कहा कि यदि प्रक्रिया मे अनावश्यक देरी होती है, तो वैकल्पिक व्यवस्था पर भी विचार किया जाएगा। हमारा उद्देश्य है कि आम लोगों को जाम और हादसों से राहत मिले।
बैठक में मौजूद रहे प्रमुख जनप्रतिनिधि
इस महत्वपूर्ण बैठक में नीमच कलेक्टर हिमांशु चंद्रा, नीमच विधायक दिलीप सिंह परिहार, जावद विधायक ओमप्रकाश सकलेचा, मनासा विधायक अनिरुद्ध माधव मारू, भाजपा जिला अध्यक्ष वंदना खंडेलवाल, नगर पालिका अध्यक्ष स्वाति चोपड़ा सहित जिले के सभी विभागों के प्रमुख अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।





