जावद की बेटी ने मेंहदी से उकेरी भगवान जगन्नाथ की पेंटिंग, बनाया विश्व रिकॉर्ड

मध्य प्रदेश के नीमच जिले के जावद कस्बे की अंजली ने मेहंदी से भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की पेंटिंग बनाकर कमाल कर दिया है। उनकी इस कला को इस्कॉन ने की ओर से सराहा गया।
Neemuch

मध्य प्रदेश के नीमच जिले के छोटे से कस्बे जावद की एक होनहार बेटी ने अपनी असीम भक्ति, धैर्य और कला के दम पर पूरे प्रदेश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। जावद निवासी रमेश चंद्र चौहान की बेटी अंजलि चौहान ने हाथों में रचाई जाने वाली पारंपरिक मेहंदी को अपनी चित्रकारी का माध्यम बनाकर बड़ा कारनामा कर दिखाया।

अंजली ने भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलराम और बहन सुभद्रा की 5×5 फीट की एक विशाल और सजीव पेंटिंग मेहंदी के जरिए तैयार की है। अंजलि की इस अद्वितीय रचनात्मकता और दिन-रात की अटूट तपस्या ने उन्हें विश्व रिकॉर्ड के सुनहरे पन्नों में जगह दिला दी है। तरराष्ट्रीय कृष्ण भावनामृत संघ इस्कॉन ने सर्टिफिकेट देकर उनका सम्मान किया।

मेंहदी से उकेरी पेंटिंग

आमतौर पर मेहंदी जैसे तरल और तेजी से सूखने वाले माध्यम से इतने बड़े कैनवास पर बारीकी से काम करना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है, लेकिन अंजलि की एकाग्रता ने इस असंभव सी लगने वाली कला को साकार कर दिखाया। इस ऐतिहासिक और मनमोहक कलाकृति का भव्य अनावरण नीमच स्थित इस्कॉन मंदिर में संत समाज और सैकड़ों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में किया गया। जब मेहंदी से साकार हुई भगवान की इस दिव्य छवि से पर्दा हटा, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें श्रद्धा से छलक उठीं और पूरा प्रांगण भगवान जगन्नाथ के जयकारों व अंजलि की भूरि-भूरि प्रशंसा से गूंज उठा।

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शक्कर और फेविकोल की ‘केमिस्ट्री’ से बची पेंटिंग 

मेहंदी से कैनवास पर इतनी बड़ी पेंटिंग बनाना कोई आसान काम नहीं था। सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि मेहंदी सूखने के बाद रंग बदलने लगती है और पपड़ी बनकर झड़ने का डर रहता है। इस तकनीकी बाधा को अंजलि ने अपनी सूझबूझ से पार किया। बतौर अंजलि “मेहंदी का रंग पूरे कैनवास पर एक समान रहे, इसके लिए मैंने मेहंदी के घोल में शक्कर की मात्रा बढ़ा दी। इससे रंग स्थिर रहा। वहीं, पेंटिंग को झड़ने से बचाने के लिए मैंने इसे छोटे-छोटे हिस्सों में बनाया और मेहंदी के सूखते ही उस पर फेविकोल की एक सुरक्षित (प्रिजर्वेटिव) परत चढ़ा दी।”

सोशल मीडिया रील से मिली ‘वर्ल्ड रिकॉर्ड’ की प्रेरणा

आजकल जहां सोशल मीडिया का इस्तेमाल केवल मनोरंजन के लिए हो रहा है, वहीं अंजलि के लिए यह एक टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। एक सामान्य मेहंदी आर्टिस्ट से विश्व रिकॉर्ड होल्डर बनने के अपने सफर पर बात करते हुए अंजलि बताती हैं कि वे हमेशा से अपने माता-पिता और जावद नगर का नाम राष्ट्रीय पटल पर रोशन करना चाहती थीं। एक दिन मोबाइल पर रील देखते हुए उन्हें खयाल आया कि क्यों न अपनी इसी पारंपरिक मेहंदी कला को एक नया मुकाम दिया जाए। उसी एक विचार ने उन्हें यह विश्व रिकॉर्ड बनाने का संकल्प दिया।

10 दिन की मेहनत और 700 ग्राम मेहंदी

इस विशालकाय और ऐतिहासिक कलाकृति को आकार देने में लगभग 700 ग्राम शुद्ध मेहंदी का उपयोग किया गया है। 5×5 फीट के इस कैनवास को जीवंत करने में अंजलि को 10 दिन का समय लगा। इस दौरान उन्होंने दिन और रात का फर्क भुलाकर खुद को पूरी तरह से भगवान जगन्नाथ की भक्ति और अपनी कला के प्रति समर्पित कर दिया।

अंजली का क्या कहना

अपनी इस अभूतपूर्व सफलता पर भावुक होते हुए अंजलि ने बताया कि कई दिनों की लगातार मेहनत के बाद पूरी हुई यह कलाकृति भगवान जगन्नाथ की असीम कृपा, परिवार के सहयोग और कला के प्रति उनके गहरे समर्पण का ही परिणाम है। जिसे वे जावद, नीमच और समूचे मध्य प्रदेश को समर्पित करती हैं। अंजलि का मानना है कि “कोई भी काम या कला छोटी या बड़ी नहीं होती; बस हमारी सोच और मेहनत बड़ी होनी चाहिए। यदि निस्वार्थ भाव और दृढ़ संकल्प के साथ प्रयास किया जाए, तो सफलता हर हाल में आपके कदम चूमती है।” अंजलि की यह वैश्विक उपलब्धि न सिर्फ चौहान परिवार और अंचल के लिए हर्ष का विषय है, बल्कि पूरे प्रदेश की युवा पीढ़ी और रचनात्मक क्षेत्र में कुछ कर गुजरने का जज्बा रखने वाली बेटियों के लिए एक जीवंत प्रेरणा बन गई है कि यदि मन में सच्चा संकल्प हो, तो छोटे से कस्बे की चौखट से भी अंतरराष्ट्रीय क्षितिज तक उड़ान भरी जा सकती है।

कमलेश सारड़ा की रिपोर्ट।

Diksha Bhanupriy
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