108 शिकायती आवेदन के बाद भी नहीं हुई सुनवाई, परेशान बुजुर्ग ने सरपंच और अफसरों पर लगाये मिलीभगत के आरोप

बुजुर्ग ने प्रशासन से मांग की है कि हैंडपंप के पास हो रहे अवैध निर्माण को तुरंत रोका जाए और उन्हें तथा उनके परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए।
Neemuch Collector Jan Sunwai

Neemuch Collector Jan Sunwai

नीमच जिले के ग्राम दारू निवासी 86 वर्षीय बुजुर्ग जमनालाल अपनी समस्या के समाधान के लिए एक साल से प्रशासन के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें न्याय नहीं मिल पाया। मंगलवार को कलेक्ट्रेट में आयोजित जनसुनवाई में वे 109वां आवेदन लेकर पहुंचे और अधिकारियों से कार्रवाई की गुहार लगाई।

जमनालाल ने बताया कि उनके घर के पास करीब 20 साल पुराना शासकीय हैंडपंप लगा हुआ है, जिससे उनके परिवार सहित आसपास के कई परिवारों को पानी मिलता है। खासकर गर्मी के दिनों में यह हैंडपंप पूरे इलाके के लोगों के लिए पीने और दैनिक उपयोग का मुख्य स्रोत है।

बुजुर्ग का आरोप है कि गांव के ही शंभूलाल पुरोहित, उनके पुत्र सूरज और भाई श्रवण द्वारा हैंडपंप के बिल्कुल पास शौचालय का निर्माण किया जा रहा है। उनका कहना है कि यदि हैंडपंप के पास शौचालय बन गया तो जमीन के नीचे का पानी दूषित हो सकता है, जिससे ग्रामीणों को गंदा पानी पीना पड़ेगा और बीमारियों का खतरा बढ़ जाएगा।

सरपंच और अधिकारियों पर मिलीभगत का आरोप 

जमनालाल ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में कई बार ग्राम पंचायत दारू और संबंधित अधिकारियों को शिकायत की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। जब उन्होंने और अन्य ग्रामीणों ने निर्माण का विरोध किया तो आरोपियों ने उन्हें धमकाया। उन्होंने आरोप लगाया कि कब्ज़ा करने वाले लोग सरपंच से मिले हुए हैं, तहसीलदार भी एक बार आये लेकिन वो भी उन लोगों का ही साथ देकर चले गए।

हैंडपंप के पास अवैध निर्माण रोकने की मांग 

बुजुर्ग ने प्रशासन से मांग की है कि हैंडपंप के पास हो रहे अवैध निर्माण को तुरंत रोका जाए और उन्हें तथा उनके परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए। उनका कहना है कि आरोपियों की आपराधिक प्रवृत्ति के कारण किसी भी समय गंभीर घटना हो सकती है। उन्होंने ये भी कहा कि जब तक मेरी सुनवाई नहीं हो जाती तब तक मैं यहाँ जनसुनवाई में शिकायत करता रहूँगा।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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