नीमच: 350 करोड़ की टेक्सटाइल फैक्ट्री के खिलाफ किसानों में आक्रोश, हाईवे पर बनी जाम की स्थिति, कलेक्ट्रेट पहुंचकर सौंपा ज्ञापन

मध्य प्रदेश के नीमच में 350 करोड़ रुपये की टेक्सटाइल फैक्ट्री के निर्माण के विरोध में 50 से अधिक गांवों के किसान सड़कों पर उतर आए हैं। पानी, जमीन और पर्यावरण को बचाने की मांग को लेकर सोमवार को एक विशाल ट्रैक्टर रैली निकाली गई।
Neemuch News Farmers' Anger

नीमच: मध्य प्रदेश के नीमच जिले में एक प्रस्तावित टेक्सटाइल फैक्ट्री को लेकर किसानों का विरोध एक बड़े आंदोलन में बदल गया है। सोमवार सुबह, मोरवन क्षेत्र के सैकड़ों किसानों ने 350 करोड़ रुपये की लागत से बन रही ‘सुविधा रेयॉन्स प्राइवेट लिमिटेड’ फैक्ट्री के खिलाफ विशाल ट्रैक्टर रैली लेकर निकले किसानों को भरवड़िया फंटे पर रोका गया है, जिसके बाद हाईवे पर जाम जैसी स्थिति बन गई है। रोके जाने से किसान बेहद आक्रोशित हो गए और कलेक्टर कार्यालय जाने की मांग करने लगे। रैली में शामिल 50 से अधिक गांवों के सैकड़ों किसानों का कहना है कि यह फैक्ट्री न केवल उनकी जमीन और जल स्रोतों को खत्म कर देगी, बल्कि क्षेत्र के पर्यावरण को भी गंभीर नुकसान पहुंचाएगी।

हमें प्रशासन ने रोका है, हम मूर्ख नहीं 

हाईवे पर जाम की बात को लेकर किसानों का कहना है कि हम शांतिपूर्ण तरीके से कलेक्टर को ज्ञापन देने जा रहे थे, इसके बाद प्रशासन द्वारा अलग-अलग जगह पर हमें रोका गया है। हमारी मंशा केवल कलेक्टर ऑफिस पहुंचकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपने की है। इसके बाद हम सभी शांतिपूर्ण तरीके से अपने घर चले जाएंगे।

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क्या कहना है किसानों का

किसानों का कहना है कि यह फैक्ट्री उनके जीवनयापन के साधनों को छीन लेगी। उनका आरोप है कि फैक्ट्री का निर्माण उस भूमि पर हो रहा है, जिसका उपयोग वे पीढ़ियों से खेती, पशुओं की चराई और खेल के मैदान के रूप में करते आए हैं।

जमीन और पानी बचाने की लड़ाई

प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों की मुख्य चिंता पानी की उपलब्धता और भूमि के बंजर होने को लेकर है। किसान नेता राजकुमार अहीर ने चेतावनी दी कि फैक्ट्री से क्षेत्र में पानी का गंभीर संकट पैदा हो सकता है।

“अगर बांध का आधा पानी फैक्ट्री को दिया गया, तो जावद, मोरवन और आसपास के गांवों में पीने और सिंचाई के लिए पानी की भारी किल्लत हो जाएगी।” — राजकुमार अहीर, किसान नेता

ग्रामीणों का आरोप है कि फैक्ट्री के लिए भूमि आवंटन बिना किसी जनसुनवाई या स्थानीय निरीक्षण के कर दिया गया। इसके अलावा, प्रस्तावित फैक्ट्री स्थल के पास ही स्कूल और स्वास्थ्य केंद्र होने से प्रदूषण और सुरक्षा को लेकर भी चिंताएं बढ़ गई हैं।

“हमें नौकरी नहीं, अपनी मिट्टी चाहिए”

किसानों ने स्पष्ट किया है कि वे विकास के नाम पर अपनी कृषि भूमि और जल स्रोतों को खोने के लिए तैयार नहीं हैं। जनपद सदस्य पूरणमल अहीर ने किसानों की भावना को व्यक्त करते हुए कहा कि वे नौकरी के बजाय खेती पर निर्भर रहना पसंद करेंगे।

“हमें नौकरी नहीं चाहिए, हम खेती करके जीवन यापन करेंगे, लेकिन अपने गांव का पानी और जमीन नहीं खोएंगे।” — पूरणमल अहीर, जनपद सदस्य

कांग्रेस के जिला उपाध्यक्ष मनोहर जाट ने भीलवाड़ा का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां इसी तरह की फैक्ट्रियों ने जमीन को बंजर कर दिया था और नीमच में ऐसी गलती नहीं दोहराई जानी चाहिए। रैली में शामिल ट्रैक्टरों पर “धरती पुत्र किसान, बात तेरी कुण सुनेगा” जैसे गीत बजाए जा रहे हैं, जो उनके संघर्ष को आवाज दे रहे हैं।

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एडीएम बीएस कनेश को सौंपा ज्ञापन 

काफी देर चली चर्चा और समझाइश के बाद किसानों के प्रतिनिधिमंडल को प्रशासन ने कलेक्टर कार्यालय तक जाने की अनुमति दी। किसानों ने वहां पहुंचकर कलेक्टर के प्रतिनिधि के रूप में एडीएम बी.एस. कनेश को अपना ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन का वाचन किसान नेता राजकुमार अहीर ने किया, जिसमें उन्होंने साफ कहा कि जब तक फैक्ट्री का निर्माण पूरी तरह से रद्द नहीं किया जाता, तब तक किसानों का विरोध जारी रहेगा।

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किसानों ने साफ किया है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो यह आंदोलन और भी बड़ा रूप लेगा। फिलहाल, यह रैली सरवानिया और जावद से होते हुए कलेक्टर कार्यालय की ओर बढ़ रही है।

नीमच से कमलेश सारडा की रिपोर्ट

Ankita Chourdia
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