मोटरसाइकिल के ‘सीक्रेट टैंक’ में छिपाकर तस्करी का खेल, 10 किलो के करीब अफीम जब्त

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ताक्स्कर कितना भी शातिर हो पुलिस की नजरों से बच नहीं सकता, ऑपरेशन त्रिनेत्र के जरिये पुलिस चोरी छिपे हो रही अफीम तस्करी पर पैनी नजर बनाये हुए है।
Neemuch opium seized

Neemuch opium seized

नीमच जिले में मादक पदार्थ तस्करों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान ऑपरेशन “त्रिनेत्र” के तहत पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। जिला स्पेशल टीम और निम्बाहेड़ा कोतवाली पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में मोटरसाइकिल में बनाई गई गुप्त स्कीम का खुलासा करते हुए करीब 10 किलो अवैध अफीम जब्त की गई है। मामले में मध्यप्रदेश के मनासा तहसील निवासी एक शातिर तस्कर को गिरफ्तार किया गया है।

निम्बाहेड़ा कोतवाली थाना प्रभारी कन्हैयालाल के अनुसार जिला स्पेशल टीम के हेड कांस्टेबल प्रमोद कुमार द्वारा जालिया चेकपोस्ट पर नाकाबंदी की जा रही थी। इसी दौरान नीमच की ओर से आ रही होंडा यूनिकॉन मोटरसाइकिल के चालक की गतिविधियां संदिग्ध नजर आईं। पुलिस ने वाहन रोककर जब गहन तलाशी ली, तो मोटरसाइकिल की पेट्रोल टंकी के नीचे विशेष रूप से बनाई गई गुप्त स्कीम का खुलासा हुआ।

‘सीक्रेट टैंक’ से करीब 10 किलो अफीम जब्त 

इस ‘सीक्रेट टैंक’ के अंदर छिपाकर रखी गई 6 पारदर्शी प्लास्टिक थैलियों में भरी 9 किलो 864 ग्राम अवैध अफीम बरामद की गई। पुलिस ने मौके पर ही आरोपी 27 वर्षीय रितुराज सिंह राठौड़ पुत्र टीकम सिंह राजपूत, निवासी पिपल्यारावजी थाना मनासा जिला नीमच (हाल निवास भीलवाड़ा) को गिरफ्तार कर लिया।

इंटरस्टेट तस्करी नेटवर्क, सप्लाई चेन की तलाश में जुटी पुलिस 

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी लंबे समय से इस तरह की तकनीकी तरकीब अपनाकर तस्करी कर रहा था। पुलिस अब इंटरस्टेट तस्करी नेटवर्क, सप्लाई चेन और इससे जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश में जुट गई है। अधिकारियों का मानना है कि आरोपी से पूछताछ में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। पुलिस की इस कार्रवाई से क्षेत्र में मादक पदार्थ तस्करों के खिलाफ सख्त संदेश गया है और ऑपरेशन “त्रिनेत्र” के तहत आगे भी ऐसी कार्रवाई जारी रहने की बात कही गई है।

Atul Saxena
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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