मध्य प्रदेश के नीमच जिले की जावद जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत झांतला में सरकारी रिकॉर्ड के संधारण में एक बड़ी लापरवाही और संभावित अनियमितता का मामला सामने आया है। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई एक महत्वपूर्ण जानकारी के जवाब में पंचायत ने 30 साल से अधिक पुराना रिकॉर्ड कार्यालय में मौजूद नहीं होने की बात लिखित में स्वीकार की है। इस खुलासे के बाद पंचायत के पुराने कामकाज की पारदर्शिता और अभिलेखों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
उल्लेखनीय है कि नीमच निवासी ख्वाजा हुसैन मंसूरी ने सूचना के अधिकार के तहत एक आवेदन लगाया था। इस आवेदन में ग्राम पंचायत झांतला से 1 जनवरी 1995 के पश्चात से आज तक बांटे गए पट्टों, उनके क्षेत्रफल और निर्माण अनुमति से संबंधित सूची की जानकारी मांगी गई थी। ग्राम पंचायत झांतला के लेटर पैड पर 24 जुलाई 2026 को दिए गए आधिकारिक जवाब में सचिव द्वारा बताया गया है कि अभिलेखों का परीक्षण किया गया, लेकिन इस संबंध में कोई रिकॉर्ड कार्यालय में नहीं मिला है।
सचिव का बयान, मुझे आए दो महीने हुए हैं
इस पूरे मामले पर जब ग्राम पंचायत के सचिव प्रकाश सिंह तागड़ से बात की गई, तो उनका कहना था कि उन्हें इस पंचायत का चार्ज संभाले हुए करीब दो महीने ही हुए हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि 1995 के लगभग के पट्टा वितरण से संबंधित जानकारी RTI के तहत मांगी गई थी, जिसे समय सीमा में ढूंढा गया लेकिन वह रिकॉर्ड कार्यालय में नहीं मिला।
सबसे हैरानी की बात यह है कि जब सचिव से पूछा गया कि क्या रिकॉर्ड गुम होने या जल जाने के संबंध में कोई थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है या उच्च अधिकारियों को सूचना दी गई है, तो उन्होंने बताया कि उन्होंने अभी तक पूर्व सचिवों से भी इस बारे में कोई चर्चा नहीं की है। उन्होंने कहा कि वे अब पुराने सचिवों से पूछेंगे कि यह रिकॉर्ड कहां है।
उठ रहे हैं कई गंभीर सवाल
ग्राम पंचायतों में पुराने पट्टे, जमीन से जुड़े दस्तावेज, और प्रस्ताव रजिस्टर बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। ऐसे में इतने लंबे समय का रिकॉर्ड गायब होना कोई सामान्य बात नहीं है। इस घटनाक्रम से कई बड़े सवाल जन्म ले रहे हैं, जैसे आखिर पंचायत के इतने महत्वपूर्ण दस्तावेज वर्तमान में कहां हैं? क्या ये रिकॉर्ड पहले पंचायत कार्यालय में मौजूद थे और अब उन्हें जानबूझकर गायब कर दिया गया है या पुराने रिकॉर्ड के रखरखाव में भारी लापरवाही बरती गई है? महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेजों के न मिलने पर अब तक एफआईआर (FIR) या उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट क्यों नहीं की गई?
उच्चस्तरीय जांच की मांग
यदि किसी सरकारी कार्यालय से जमीनों और पट्टों जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज गायब या अनुपलब्ध हो जाते हैं, तो यह सीधे तौर पर सरकारी कार्यप्रणाली की विश्वसनीयता पर चोट है। अब यह आवश्यक हो गया है कि जनपद पंचायत जावद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी और संबंधित उच्च अधिकारी इस मामले को गंभीरता से लें।
पुराने सचिवों के कार्यकाल के रजिस्टरों और दस्तावेजों का मिलान करवाकर यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि RTI में मांगी गई जानकारी का रिकॉर्ड आखिर गया कहां और पंचायत कार्यालय में क्यों नहीं है। अगर ग्राम पंचायत के महत्वपूर्ण पुराने दस्तावेज ही सुरक्षित नहीं हैं, तो पंचायत के कामकाज की पारदर्शिता पर जनता का भरोसा कैसे कायम रहेगा? अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में क्या संज्ञान लेता है।







