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16 साल पुराने फर्जी एनकाउंटर केस में टीआई सस्पेंड, CBI के वारंट जारी होते ही हो गए गायब

Written by:Atul Saxena
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हाल ही में कोर्ट की सख्ती के बाद सीबीआई ने मामले की जांच और कार्रवाई तेज कर दी है।  नीमच के इस फर्जी एनकाउंटर के मामले में टीआई पपोला के साथ कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है।
16 साल पुराने फर्जी एनकाउंटर केस में टीआई सस्पेंड, CBI के वारंट जारी होते ही हो गए गायब

ग्वालियर के झांसी रोड थाने में पदस्थ रहते हुए लीव पर गए टीआई मंगल सिंह पपोला चार महीने बाद भी वापस नहीं लौटे हैं। जिसके बाद शनिवार रात को एसएसपी ग्वालियर धर्मवीर सिंह ने टीआई मंगल सिंह को सस्पेंड कर दिया है। सस्पेंड टीआई ने 16 साल पहले हवलदार रहते हुए एमपी के नीमच में एनकाउंटर में एक तस्कर को मार गिराया था। जिस पर आउट ऑफ टर्न प्रमोशन भी मिला था।

मंगल सिंह पपोला हवलदार रहते हुए जिसका एनकाउंटर करना बताया था, तीन साल बाद ही जिंदा लौट आया था। तभी से मामले की जांच चल रही थी। हाल ही में मामले की जांच सीबीआई केपास आई थी। अप्रैल 2025 में सीबीआई ने टीआई खिलाफ वारंट जारी किया था। जिस पर वह लीव लेकर गायब हो गए थे। चार महीने बाद भी लौटकर नहीं आने पर अब एसएसपी ने सस्पेंड कर दिया है।

सीबीआई ने जारी किया मंगल सिंह पपोला के खिलाफ वारंट 

नीमच में 16 साल पहले हुए एक फर्जी एनकाउंटर मामले में सीबीआई ने ग्वालियर के झांसी रोड थाने के टीआई मंगल सिंह पपोला के खिलाफ वारंट जारी किया है। सन 2009 में पुलिस ने दावा किया था कि उन्होंने 7 और 8 फरवरी की रात नशे के तस्कर बंशी गुर्जर को एनकाउंटर में मार गिराया है।

जिसे मारने का दावा किया वो जिन्दा लौट आया 

नीमच थाने की पुलिस ने खूब सुर्खियां बटोरी थी, हालांकि, इस मामले में नया मोड़ उस समय सामने आया है, जब तीन साल बाद यानी 2012 में बंशी गुर्जर लौट आया। बंशी गुर्जर के लौट आने के बाद स्पष्ट हो गया है कि पुलिस ने फेक एनकाउंटर किया था, जिसमें मारा गया कोई और व्यक्ति था।

सीबीआई के वारंट जारी करते ही गायब हुआ टीआई पपोला

ग्वालियर के झांसी रोड थाने में तैनात टीआई मंगल सिंह पपोला सीबीआई की कार्रवाई के दायरे में आ गए। सीबीआई ने उनके खिलाफ अप्रैल 2025 में एक वारंट जारी किया था, लेकिन जब यह वारंट लेकर सीबीआई कॉन्स्टेबल थाने पहुंचा, तो पपोला वहां नहीं थे। इसके बाद जब टीआई से संपर्क करने की कोशिश की गई तो उनको कुछ भी पता नहीं चला। पपोला अपना मोबाइल फोन बंद करके अंडरग्राउंड हो गए हैं। इसके बाद वह स्पेशल पे लीव लेकर गायब हो गए थे।

फर्जी एनकाउंटर के बाद मिला था प्रमोशन

कथित एनकाउंटर में मंगल सिंह पपोला भी शामिल थे, जो साल 2009 में हेड कॉन्स्टेबल की पोस्ट पर थे। इस एनकाउंटर के बाद पपोला को प्रमोशन भी मिला था। अभी फिलहाल पपोला टीआई के रूप में ग्वालियर के झांसी रोड थाने में थे।

पहले CID को सौंपी गई थी जांच

इस फर्जी एनकाउंटर की जांच शुरुआत में सीआईडी को सौंपी गई थी, लेकिन इस मामले के पुलिस विभाग से जुड़े होने के कारण इसमें काफी लीपापोती के आरोप लगे थे। इसके बाद कोर्ट में दायर एक याचिका पर फैसला सुनाते हुए उसे सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया।

नीमच से कमलेश सारड़ा की रिपोर्ट 

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Atul Saxena
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena
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