मध्य प्रदेश की मुख्यमंत्री युवा अन्नदूत योजना के तहत खाद्यान्न परिवहन कर रहे पंजीकृत ट्रांसपोर्टर अब अपनी समस्याओं को लेकर खुलकर सामने आ गए हैं। दरअसल भोपाल में आयोजित बैठक में प्रदेशभर से आए परिवहनकर्ताओं ने कहा कि लंबे समय से भुगतान में देरी और बढ़ते खर्च के कारण उनका काम प्रभावित हो रहा है।
वहीं बैठक के बाद ट्रांसपोर्टर संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने उपमुख्यमंत्री एवं वित्त व वाणिज्यिक कर मंत्री जगदीश देवड़ा, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत और विभाग के आयुक्त से मुलाकात कर अपनी मांगों का विस्तृत ज्ञापन सौंपा। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष नरेंद्र मौर्य ने कहा कि समय पर भुगतान और परिवहन दरों में संशोधन उनकी प्रमुख मांग है।
ट्रांसपोर्टरों ने उठाए भुगतान और डीजल दरों के मुद्दे
दरअसल भोपाल में हुई बैठक में ट्रांसपोर्टरों ने कहा कि पिछले एक साल से SNS पोर्टल की तकनीकी दिक्कतों के कारण कई जिलों में दो-दो महीने का भुगतान अटका हुआ है। उनका कहना है कि समय पर राशि नहीं मिलने से वाहन मालिकों को बैंक की EMI चुकाने में परेशानी हो रही है, जबकि वाहन नियमित रूप से चलाने का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है। संगठन ने यह भी बताया कि पिछले तीन वर्षों से परिवहन दरों में कोई संशोधन नहीं हुआ है। इस दौरान डीजल, टायर, बीमा और वाहन रखरखाव की लागत पहले के मुकाबले काफी बढ़ चुकी है। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि मौजूदा दरों पर काम करना आर्थिक रूप से मुश्किल होता जा रहा है।
वहीं ज्ञापन में टोल भुगतान का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। संगठन के मुताबिक शासन के आदेश होने के बावजूद कई परिवहनकर्ताओं को अब तक टोल का भुगतान नहीं मिला है। इसके अलावा ICDS, MDM और KKY जैसी योजनाओं के तहत किए गए परिवहन का भुगतान भी तय समय पर करने की मांग रखी गई।
रखीं ये प्रमुख मांगें
दरअसल बैठक के बाद संगठन का प्रतिनिधिमंडल सीधे शासन स्तर पर पहुंचा और अपनी समस्याओं को विस्तार से रखा। प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि यदि भुगतान समय पर नहीं हुआ और बढ़ती लागत के हिसाब से दरों की समीक्षा नहीं की गई, तो परिवहन व्यवस्था पर असर पड़ सकता है।

ट्रांसपोर्टरों ने ज्ञापन में प्रमुख रूप से ये मांगें रखीं –
- SNS पोर्टल से जुड़े लंबित भुगतानों का जल्द निपटारा किया जाए।
- बढ़ती डीजल और रखरखाव लागत के अनुसार परिवहन दरों का पुनरीक्षण किया जाए।
- टोल भुगतान की लंबित राशि जारी की जाए।
- ICDS, MDM और KKY जैसी योजनाओं के परिवहन भुगतान समय-सीमा में किए जाएं।
- भविष्य में भुगतान प्रक्रिया को तकनीकी अड़चनों से मुक्त और नियमित बनाया जाए।
कमलेश सारडा, नीमच






