राम मंदिर : कांग्रेस विधायक के घर सजा राम दरबार, कहा मुहूर्त कैसा भी हो मंदिर भव्य बन जाये

राम मंदिर : कांग्रेस विधायक के घर सजा राम दरबार, कहा मुहूर्त कैसा भी हो मंदिर भव्य बन जाये

बैतूल, वाजिद खान

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर निर्माण भूमि पूजन के शुभ मुहूर्त पर सवाल उठाए और कहा था कि मुहूर्त ठीक नही है तो वही उनकी ही पार्टी के विधायक राम मंदिर का भव्य निर्माण हो इसके लिए सुंदरकांड करा रहे है । मध्य प्रदेश के बैतूल में राम मंदिर भूमि पूजन के एक दिन पहले यानी आज कांग्रेस विधायक निलय डागा के निवास पर राम नाम की धूम है और भगवान राम का दरबार सजा है । विधायक निलय डागा ने राम मंदिर के भूमि पूजन कार्यक्रम अच्छे से हो और राम मंदिर भव्य बने इसके लिए सुंदरकांड कराया । भगवा रंग में डूबे विधायक भजनों पर झूमते नजर भी आये ।

विधायक निलय डागा का कहना है कि जो पूज्य राम भगवान है जिनका मंदिर अयोध्या में बनने जा रहा है उसकी खुशहाली में और जल्दी राम मंदिर बन कर तैयार हो उसके लिए सुंदरकांड और हनुमान चालीसा का पाठ कराया जा रहा है । इसके साथ ही जिले की खुशहाली किसानों की अच्छी फसल हो जो बारिश कम हुई है वो बारिश अच्छी हो इसके लिए यह प्रोग्राम रखा है । बहुत भव्य राम मंदिर बने पूरे विश्व मे उसके सुंदरता की चर्चा हो, भव्यता की चर्चा हो, वहीं मुहूर्त को लेकर उन्होंने कहा कि स्वरूपानंद जी और हमारे वरिष्ठ नेता ने भी कहा है कि मुहूर्त ठीक नही है ,हम तो चाहते है मुहूर्त कैसा भी हो लेकिन मंदिर बन जाये । जहां आज पूरा देश भगवा रंग में रंगा है तो वही कांग्रेस विधायक भी भगवा रंग में दिख रहे है ।

Gaurav Sharma
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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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