बाड़मेर में मजदूरों के हक की लड़ाई ने आज उस समय एक नया और सनसनीखेज मोड़ ले लिया, जब शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने कलेक्ट्रेट घेराव के दौरान अचानक खुद पर पेट्रोल छिड़क कर आत्मदाह का प्रयास किया। दरअसल घटना ने मौके पर मौजूद सभी लोगों को स्तब्ध कर दिया, मजदूरों के उनतालीस दिनों से चल रहे आंदोलन के बीच हुई। गनीमत रही कि पुलिसकर्मियों की तत्परता और सूझबूझ ने एक बड़ी अनहोनी को टाल दिया, अन्यथा स्थिति की भयावहता का अंदाजा लगाना भी मुश्किल था। अचानक हुए इस नाटकीय घटनाक्रम से स्थानीय प्रशासन के हाथ-पैर फूल गए और बिना किसी देरी के रविंद्र सिंह भाटी को कलेक्ट्रेट परिसर के भीतर ले जाया गया। आइए जानते हैं आखिर क्यों विधायक ने उठाया यह खौफनाक कदम और क्या है इस पूरे मामले की जड़।
दरअसल खुद पर पेट्रोल छिड़कते हुए, विधायक भाटी ने सरकार पर सीधा और तीखा हमला बोला। उनकी आवाज में आक्रोश और दृढ़ता साफ झलक रही थी जब उन्होंने कहा, “सरकार मजदूरों को दबाने का काम कर रही है। मारना है तो मुझे मारो। मजदूरों को क्यों मार रहे हो?” उनके ये शब्द सिर्फ एक बयान नहीं थे, बल्कि उन सैकड़ों मजदूरों की पीड़ा और गुस्से का इजहार थे जो गिरल लिग्नाइट माइंस में अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनके इस आह्वान ने आंदोलनकारी मजदूरों में एक नई ऊर्जा और जोश का संचार कर दिया।
जानिए क्या है पूरा मामला?
यह पूरा मामला राजस्थान स्टेट माइंस एंड मिनरल्स लिमिटेड (RSMML) की गिरल लिग्नाइट माइंस से जुड़ा है, जहां 9 अप्रैल से मजदूरों का आंदोलन लगातार जारी है। पिछले उनतालीस दिनों से चल रहा यह प्रदर्शन, कंपनी द्वारा जमीन अधिग्रहण के बाद किए गए वादों को पूरा न करने के कारण उपजा है। दरअसल, थुंबली गिरल और आसपास के क्षेत्रों में जमीन अधिग्रहण तीस साल पहले हुआ था, उस समय स्थानीय लोगों को रोजगार देने का वादा किया गया था। लेकिन, आरोप है कि न केवल वे वादे पूरे नहीं हुए, बल्कि अब कई स्थानीय युवाओं को काम से भी हटाया जा रहा है। इसी अन्याय के खिलाफ स्थानीय लोगों में जबरदस्त आक्रोश पनप रहा है, जिसने आज यह उग्र रूप ले लिया।
मजदूरों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं रविंद्र सिंह भाटी
विधायक रविंद्र सिंह भाटी इस आंदोलन की शुरुआत से ही मजदूरों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। वे खुद कई दिनों से मजदूरों के साथ धरने पर बैठे थे और आज भी सैकड़ों की संख्या में आंदोलन कर रहे मजदूरों का नेतृत्व करते हुए धरना स्थल से कलेक्ट्रेट परिसर तक पहुंचे थे। उन्होंने मंगलवार को ही एक प्रेस वार्ता में स्पष्ट चेतावनी दी थी कि यदि सरकार ने मजदूरों की मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो वे आर-पार की लड़ाई लड़ने को मजबूर होंगे। उनकी यह चेतावनी आज आत्मदाह के प्रयास के रूप में चरितार्थ हुई, जिसने पूरे प्रदेश की राजनीति में भूचाल ला दिया है।
वहीं मजदूरों की प्रमुख मांगों में आठ घंटे की ड्यूटी समय निर्धारित करना, स्थानीय युवाओं को नौकरी में प्राथमिकता देना और कंपनी द्वारा रोजगार के संबंध में किए गए सभी वादों को पूरा करना शामिल है। उनका स्पष्ट मत है कि वे अपने अधिकारों के लिए तब तक संघर्ष करते रहेंगे जब तक उनकी सभी जायज मांगें पूरी नहीं हो जातीं। विधायक भाटी का यह साहसिक और जोखिम भरा कदम न केवल मजदूरों के प्रति उनके अटूट समर्थन को दर्शाता है, बल्कि सरकार की कार्यप्रणाली के प्रति उनके गहरे असंतोष को भी उजागर करता है।






