नियमों को ताक पर रख कंटेनमेंट जोन में पहुंचे पूर्व मंत्री

नियमों को ताक पर रख कंटेनमेंट जोन में पहुंचे पूर्व मंत्री

राजगढ़| केंद्र सरकार (Central Government) की उपलब्धियां बताने मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के राजगढ़ (Rajgadh) प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री उमाशंकर गुप्ता (UmaShankar Gupta) वैश्य समाज के जिला अध्यक्ष केएन गुप्ता के घर कोविड-19 के सारे नियमों को ताक पर रखकर उनके घर बैठने पहुंचे। साथ ही लोगो के साथ नाश्ता किया| जिस घर पूर्व मंत्री गुप्ता नाश्ते के लिए गए थे ,उसके समीप ही एक महिला की कोरोना पाजेटिव मिली है, जो कि कंटेनमेंट एरिया में शामिल है।

शुक्रवार की सुबह जिले की सैंपलिंग की रिपोर्ट आने के बाद तीन पॉजिटिव मरीज सामने आए। इनमें से दो ब्यावरा और एक राजगढ़ की शंकर कॉलोनी में एएनएम को कोरोना संक्रमण मिला है। यही कारण है कि इस पूरी एरिया को सील किया गया है। लेकिन पूर्व मंत्री और भाजपा नेता उमा शंकर गुप्ता कंटेनमेंट एरिया में बैरिकेट्स हटवा कर उनके घर बैठने पहुंचे और जिस एरिए को चारों तरफ से सील किया गया है। वहां से किसी भी व्यक्ति को आने-जाने पर प्रतिबंध है। वहां सिर्फ उमाशंकर गुप्ता नहीं पहुंचे बल्कि केएन गुप्ता भी उस मोहल्ले से संस्कृति होटल तक पहुंचे और उन्हें अपने घर लेकर गए। सवाल उठता है कि क्या यह सारे प्रतिबंध या नियम आमजन पर हैं इनका रसूख पर कोई असर नहीं जो, शासन द्वारा बनाए गए नियमों को तोड़ने पर भी किसी प्रकार की कोई कार्रवाई की जगह उनके साथ खुद अधिकारी या कर्मचारी मौजूद रहते हैं।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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