रतलाम में सड़क निर्माण में देरी को लेकर महापौर प्रहलाद पटेल और नगर निगम कमिश्नर अनिल भाना के बीच तीखी बहस हो गई। दरअसल व्यापारियों और रहवासियों के सामने महापौर ने नगर निगम के सिस्टम और इंजीनियरों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि शहर में 400 करोड़ रुपए के निर्माण कार्य अधिकारियों के भरोसे नहीं, बल्कि उनकी मेहनत से पूरे हुए हैं। वहीं कमिश्नर ने सड़क का काम पूरा करने के लिए 58 दिन का समय मांगा। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने लिखित आश्वासन और निर्माण कार्यों की समयसीमा तय करने की मांग की।

दरअसल महापौर ने कहा कि शहर में चल रहे निर्माण कार्यों की चिंता अधिकारी नहीं कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि पिछले तीन साल में 400 करोड़ रुपए के काम उनकी मेहनत से जमीन पर उतरे हैं। दूसरी ओर रहवासी और व्यापारी इस बात पर अड़े रहे कि सड़क निर्माण पूरा करने की तारीख लिखित में दी जाए। वहीं कमिश्नर ने 58 दिन में काम पूरा करने की बात कही। इसके बाद दोपहर करीब 1 बजे प्रदर्शन खत्म हुआ।

महापौर ने नगर निगम के सिस्टम पर उठाए सवाल

कमिश्नर अनिल भाना के मौके पर पहुंचने के बाद महापौर प्रहलाद पटेल ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा “अगर इस नगर के अंदर मैं निर्माण कार्य की चिंता नहीं करूं तो नगर निगम पूरी की पूरी लाशों का ढेर है इसके अलावा कुछ नहीं।” महापौर ने सिस्टम को लाचार बताते हुए कहा कि अधिकारियों और इंजीनियरों को काम की चिंता नहीं है। वहीं महापौर ने कहा कि वह जनता के प्रतिनिधि हैं और लोगों के सामने उन्हें जवाब देना पड़ता है। सड़क निर्माण शुरू होने पर काम पूरा करने की समयसीमा तय होनी चाहिए। इसके लिए सड़क के पास बोर्ड लगाकर टेंडर की शर्तों और काम पूरा करने की तारीख की जानकारी भी दी जानी चाहिए।

पिछले तीन साल में 400 करोड़ रुपए के काम हुए: महापौर

उन्होंने बताया कि सड़क का काम शुरू होने के समय उन्हें तीन महीने में निर्माण पूरा होने की जानकारी दी गई थी। इसी आधार पर उन्होंने जनता को जवाब दिया लेकिन काम में देरी होने से उन्हें लोगों के सवालों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं महापौर ने यह भी कहा कि उन्होंने शहर में निर्माण कार्यों को पूरा कराने के लिए रात-रातभर फाइलें चलवाईं और अधिकारियों के पीछे लगे रहे। उनके मुताबिक पिछले तीन साल में 400 करोड़ रुपए के काम हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कई मामलों में अधिकारी फाइलों पर समय रहते कार्रवाई नहीं करते और जरूरी मंजूरी के लिए लगातार फॉलोअप भी नहीं लेते।

ठेकेदार पर भी कार्रवाई की चेतावनी

दरअसल सड़क निर्माण में देरी को लेकर व्यापारियों और रहवासियों ने महापौर और कमिश्नर से साफ जवाब मांगा। लोगों की मांग थी कि फोरलेन का काम कब तक पूरा होगा इसकी समयसीमा लिखित में दी जाए। इस पर कमिश्नर अनिल भाना ने 58 दिन में काम पूरा करने की बात कही। महापौर के मुताबिक उन्होंने कमिश्नर से पूछा कि अगर तय समय में काम पूरा नहीं हुआ तो क्या होगा। इस पर कमिश्नर ने नौकरी छोड़ने की बात कही। हालांकि रहवासी और व्यापारी लिखित आश्वासन की मांग पर अड़े रहे। महापौर ने ठेकेदार तिमन्ना को लेकर भी सख्त रुख दिखाया। उन्होंने कहा कि अगर ठेकेदार तय समय में सड़क निर्माण पूरा नहीं करता है तो उसके खिलाफ ऐसी फाइल तैयार कराई जाएगी कि वह भविष्य में कहीं काम नहीं कर सके।

महापौर ने सड़क निर्माण में देरी के पीछे डामर के बढ़े हुए दाम को भी एक वजह बताया। उनके मुताबिक, ईरान युद्ध के कारण डामर के रेट में 60 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है, जिससे ठेकेदार काम करने में सुस्ती दिखा रहे हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि बढ़ी हुई लागत के बावजूद काम पूरा करना ठेकेदार की जिम्मेदारी है।

क्या है रहवासियों की मांगें?

वहीं रहवासियों ने बड़बड़ हनुमान मंदिर की तरह डिवाइडर बनाने और हाईटेंशन बिजली लाइनों की व्यवस्था स्पष्ट करने की मांग की। उनका कहना था कि डिवाइडर बनाने से पहले बिजली के पोल और पेड़ों की शिफ्टिंग के साथ पानी, सीवरेज और गैस की लाइनों से जुड़े काम पूरे होने चाहिए। इसके अलावा नाले की नियमित सफाई कराने की मांग भी रखी गई, ताकि मच्छरों और बीमारियों की समस्या से राहत मिल सके। नगर निगम ने जिन जगहों पर पेड़ों को शिफ्ट किया है उनकी सूची रहवासी संघ को देने की मांग भी की गई। रहवासियों ने कहा कि सूची मिलने पर संघ पेड़ों की सिंचाई और सुरक्षा की जिम्मेदारी ले सकता है।