
रतलाम, डेस्क रिपोर्ट। रतलाम की बबली गंभीर को प्रतिष्ठित ‘डॉ सरोजिनी नायडू इंटरनेशनल अवार्ड’ से सम्मानित किया गया है। नोएडा के फिल्म सिटी स्थित एशियन अकेडमी ऑफ आर्ट्स के ग्लोबल लिटरेरी फेस्टिवल में ये सम्मान प्रदान किया गया। संस्था के निदेशक डॉ संदीप मारवाह एएएफटी यूनिवर्सिटी ऑफ मीडिया एंड आर्ट्स के मारवाह स्टूडियो के चांसलर और एशियाई शिक्षा समूह के अध्यक्ष हैं।
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‘6वां डॉ सरोजिनी नायडू द नाइटिंगेल आफ इंडिया इंटरनेशनल अवार्ड’ से सम्मानित होने वाली बबली गंभीर का जीवन एक मिसाल है। 10 अक्टूबर को जन्मी बबली गंभीर ने इंग्लिश लिटरेचर में एमए किया है। वे एक जानी मानी एस्थेटिशियन, स्किन सॉल्यूशन स्पेशलिस्ट और ब्यूटी पार्लर की संचालिका हैं। रतलाम जिले के जावरा शहर की रहने वाली बबली का जन्म हुआ तो उनके हाथ असामान्य थे। छोटे-छोटे हाथों में से एक में तीन और दूसरे में सिर्फ ढाई उंगलियां थी। जन्म के साथ ही जब लोगों ने ये देखा तो सभी सकते में आ गए, कई लोगों ने तो ये तक कहा कि एक तो बेटी उसपर से इस तरह की असामान्य स्थिति, उनके लिए जीवन बेहद कठिन होने वाला है। लेकिन इस कठिनाई के साथ ही एक जज्बे का भी जन्म हो चुका था।
बबली को उनके पिता ने बेहद प्यार से संभाला, मां ने जीवन की कठिनाईयों से उबरना सिखाया और बहनों ने कदम कदम पर साथ दिया। 8 भाई बहनों में बबली सबसे छोटी थी। पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बाद बबली ने ब्यूूटिशियन का कोर्स किया और आज वे बहुत ही सफल ब्यूटिशिनय हैं। पिछले 27 साल से वो अपना ब्यूटी पार्लर चला रही हैं। उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार, राष्ट्रीय उत्कृष्ट सृजनशील वयस्क पुरस्कार सहित कई पुरस्कार मिल चुके हैं। आज स्थिति ये है कि जिन हाथों के लिए उन्हें कभी लोगों के उलाहनों का सामना करना पड़ता था, उन्हीं जादुई हाथों से वो दूसरों को खूबसूरत बना रही हैं। ब्यूटी पार्लर चलाने के साथ वे इंटीरियर डिजाइनर और पेंटर भी है। इसी के साथ वह बहुत अच्छा ढोलक भी बजाती है, सिलाई-कढ़ाई करते हुए गाड़ी भी चलाती हैं।
पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.


