कब लगने जा रहा है साल का दूसरा चन्द्रग्रहण, जानें डेट-टाइम और धार्मिक महत्व, क्या राशियों पर पड़ेगा असर?

सितंबर में पितृपक्ष की पूर्णिमा की शुरुआत में चंद्र ग्रहण लगने वाला है।यह भारत में भी दिखाई देगा जिसके चलते सूतककाल मान्य होगा आईए जानते है सितंबर में लगने वाले ग्रहण के समय, तारीख और सूतककाल के साथ धार्मिक महत्व के बारें में…………
Chandra surya Grahan

साल का पहला चन्द्र ग्रहण 14 मार्च होली पर लगा था और अब साल का दूसरा चन्द्र ग्रहण सितंबर 2025 में लगने वाला है। यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा, ऐसे में सूतक काल भी मान्य होगा। यह ग्रहण लाल सुर्ख होगा, जिसके चलते इसे ब्लड मून का नाम दिया गया है।पितृपक्ष के पहले दिन चंद्र ग्रहण ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, साल का दूसरा चंद्र ग्रहण 7 सितंबर को भाद्रपद्र की पूर्णिमा को लगेगा।भारतीय समयानुसार ग्रहण 7 सितंबर को 9:57 मिनट से 8 सितंबर की रात 12:23 मिनट तक रहेगा।इसका सूतककाल दोपहर 12 बजकर 35 मिनट पर शुरू हो जाएगा। चुंकी चन्द्र ग्रहण में सूतक काल ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले लग जाता है। भारत के साथ ही ऑस्ट्रेलिया, यूरोप, न्यूजीलैंड, अमेरिका और अफ्रीका पर भी देखाई देगा।

इन राशियों को मिलेगा लाभ

पितृ पक्ष के दौरान लगने वाला चंद्र ग्रहण मकर मिथुन और धनु राशि वालों के लिए लकी साबित हो सकता है। जातकों को आकस्मिक धनलाभ, काम- कारोबार में तरक्की, बेरोजगारों को नौकरी के नए अवसर, नौकरीपेशा को पदोन्नति और निवेश से लाभ मिल सकता है। अविवाहितों को विवाह के प्रस्ताव मिल सकते हैं।देश- विदेश की यात्रा और रुका हुआ धन वापस मिल सकता है।संपत्ति खरीदने या वाहन लेने के लिए भी समय शुभ है।

जानिए कब लगता है चन्द्र ग्रहण?

  • चंद्र ग्रहण के दौरान सूर्य की परिक्रमा के दौरान पृथ्वी, चांद और सूर्य के बीच आ जाती है, इस दौरान चांद धरती की छाया से पूरी तरह से छुप जाता है।
  • पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक दूसरे के बिल्कुल सीध में होते हैं। इस दौरान जब हम धरती से चांद देखते हैं तो वह हमें काला नजर आता है और इसे चंद्रग्रहण कहा जाता है।
  • आंशिक चंद्र ग्रहण के दौरान सिर्फ चांद का एक भाग पृथ्वी की छाया में प्रवेश करता है। चंद्रमा के धरती की तरफ वाले हिस्से पर धरती की छाया काली दिखाई देती है, कटा हिस्सा दिखाई देता है, तो वह इस पर निर्भर करता है कि किस प्रकार सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीध में हैं।
  • उपछाया चंद्र ग्रहण के दौरान धरती की छाया का हल्का बाहरी भाग चंद्रमा की सतह पर पड़ता है। इस ग्रहण को देखना कुछ मुश्किल होता है।

ग्रहण में क्या करें और क्या नहीं?

  • ग्रहण के सूतक काल में पूजा पाठ बंद कर देना चाहिए।
  • ग्रहण के अवधि के दौरान घर के पूजा वाले स्थान को पर्दे से ढक दें।
  • ग्रहण में भूलकर भी देवी-देवताओं की पूजा नहीं करना चाहिए।
  • ग्रहण के दौरान खाना-पीना नही चाहिए।
  • खाद्य पदार्थों में तुलसी के पत्ते डालकर रखना चाहिए
  • ग्रहण की समाप्ति के बाद घर और पूजा स्थल को गंगाजल का छिड़काव करके शुद्ध करना चाहिए।
  • गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान विशेष सावधानी बरतनी चाहिए, उन्हें घर से
    बाहर नहीं निकलना चाहिए और न ही ग्रहण देखना चाहिए।
  • ग्रहण के सूतक काल में भोजन बनाना, खाना, सोना, बाल काटना, तेल लगाना,
    सिलाई-कढ़ाई करना और चाकू चलाना नहीं चाहिए।

(Disclaimer : यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों और जानकारियों पर आधारित है, MP BREAKING NEWS किसी भी तरह की मान्यता-जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है। इन पर अमल लाने से पहले अपने ज्योतिषाचार्य या पंडित से संपर्क करें)

Pooja Khodani
लेखक के बारे में
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12 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में.

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