17 फरवरी 2026 को साल का पहला सूर्य ग्रहण लगा था और अब ठीक 15 दिन बाद मार्च में साल का पहला चंद्र ग्रहण लगेगा। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, यह चंद्र ग्रहण 3 मार्च 2026 को फाल्गुन मास की पूर्णिमा पर लगेगा। इस दौरान मन के कारक चंद्रमा सिंह राशि और पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में रहेंगे। इस बार होलिका दहन पर चंद्र ग्रहण का साया रहने वाला है। हिंदू पंचाग के अनुसार, 3 मार्च को होलिका दहन और 4 मार्च को होली (रंग पर्व) खेली जाएगी।
चंद्र ग्रहण का समय और अवधि
- चंद्र ग्रहण की शुरुआत दोपहर 2 बजकर 16 मिनट से होगी। मुख्य प्रभाव दोपहर 3 बजकर 21 मिनट से दिखाई देगा। शाम 6 बजकर 46 मिनट पर चंद्रमा ग्रहण से बाहर आने लगेगा।
- चंद्र ग्रहण पूरी तरह शाम 7 बजकर 52 मिनट पर समाप्त हो जाएगा। सूतक सुबह 9 बजकर 39 मिनट से शुरू होकर शाम 6 बजकर 46 मिनट तक रहेगा।
- बता दें कि चंद्र ग्रहण आरंभ होने के 9 घंटे पहले से सूतक काल आरंभ हो जाता है। ऐसे में 3 मार्च को को सुबह 09:39 बजे से सूतक काल आरंभ होगा, जो ग्रहण समाप्त होने के साथ समापन होगा।
भारत में भी दिखेगा साल का पहला चंद्रग्रहण
- यह ग्रहण भारत के साथ साथ एशिया, ऑस्ट्रेलिया, उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका जैसे कई देशों में भी दिखाई देगा। चूंकि भारत में यह ग्रहण दिखेगा, इसलिए सूतक काल भी मान्य होगा।
- चंद्र ग्रहण सबसे ज्यादा प्रभाव पूर्वी भारत यानी अरुणाचल प्रदेश, असम, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम में दिखाई देगा। पश्चिम बंगाल के पूर्वी हिस्सों के अलावा कोलकाता, गुवाहाटी, ईटानगर और आइजोल, दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई, लखनऊ, और जयपुर जैसे शहरों में भी यह दिखाई देगा।
महत्वपूर्ण जानकारी
- चंद्रग्रहण की तारीख: 3 मार्च 2026, मंगलवार
- चंद्रग्रहण का आरंभ समय: दोपहर 2:16 PM (लगभग)
- चंद्रग्रहण का समापन: शाम 7:52 PM (लगभग)
- सूतक का समय: 3 मार्च को सुबह लगभग 6:20 AM से
- भारत में दिखने का समय (चंद्रोदय) : शाम 06:26 बजे, अधिकतम ग्रहण : शाम 06:33 बजे से शाम 06:40 बजे तक, ग्रहण समाप्त : शाम 06:46 बजे
जानिए कब लगता है चंद्र ग्रहण
- चंद्र ग्रहण के दौरान सूर्य की परिक्रमा के दौरान पृथ्वी, चांद और सूर्य के बीच आ जाती है, इस दौरान चांद धरती की छाया से पूरी तरह से छुप जाता है।
- पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक दूसरे के बिल्कुल सीध में होते हैं। इस दौरान जब हम धरती से चांद देखते हैं तो वह हमें काला नजर आता है और इसे चंद्रग्रहण कहा जाता है।
- आंशिक चंद्र ग्रहण के दौरान सिर्फ चांद का एक भाग पृथ्वी की छाया में प्रवेश करता है। चंद्रमा के धरती की तरफ वाले हिस्से पर धरती की छाया काली दिखाई देती है, कटा हिस्सा दिखाई देता है, तो वह इस पर निर्भर करता है कि किस प्रकार सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीध में हैं।
किन राशियों के लिए शुभ और अशुभ?
वैदिक ज्योतिष के अनुसार, धनु, मेष, सिंह, वृषभ और मकर राशि वालों के लिए चंद्र ग्रहण लाभप्रद सिद्ध हो सकता है। इस अवधि में कोई वाहन या प्रापर्टी खरीदने के योग बन सकते हैं। आय, साहस और पराक्रम में वृद्धि के प्रबल संकेत हैं। व्यापारियों को धनलाभ के साथ नौकरीपेशा को वेतनवृद्धि व पदोन्नति का लाभ मिल सकता है।। देश- विदेश की यात्रा कर सकते हैं। समाज में मान- सम्मान और प्रतिष्ठा की प्राप्ति हो सकती है। कर्क, कुंभ और मीन राशि वालों पर ग्रहण नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। किसी भी काम में जल्दबाजी ना करें। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। मानसिक तनाव का सामना करना पड़ सकता है।
ग्रहण में क्या करें और क्या नहीं?
- ग्रहण के सूतक काल में पूजा पाठ बंद कर देना चाहिए।
- ग्रहण के अवधि के दौरान घर के पूजा वाले स्थान को पर्दे से ढक दें।
- ग्रहण में भूलकर भी देवी-देवताओं की पूजा नहीं करना चाहिए।
- ग्रहण के दौरान खाना-पीना नही चाहिए।
- खाद्य पदार्थों में तुलसी के पत्ते डालकर रखना चाहिए
- ग्रहण की समाप्ति के बाद घर और पूजा स्थल को गंगाजल का छिड़काव करके शुद्ध करना चाहिए।
- गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान विशेष सावधानी बरतनी चाहिए, उन्हें घर से
बाहर नहीं निकलना चाहिए और न ही ग्रहण देखना चाहिए। - ग्रहण के सूतक काल में भोजन बनाना, खाना, सोना, बाल काटना, तेल लगाना,
सिलाई-कढ़ाई करना और चाकू चलाना नहीं चाहिए।
(Disclaimer : यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों और जानकारियों पर आधारित है, MP BREAKING NEWS किसी भी तरह की मान्यता-जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है। इन पर अमल लाने से पहले अपने ज्योतिषाचार्य या पंडित से संपर्क करें)






