हर महीने आने वाली संकष्टी चतुर्थी (Sankashti Chaturthi) भक्तों के लिए बेहद शुभ मानी जाती है, लेकिन जब यह चतुर्थी मंगलवार या शुक्रवार को पड़ती है, तो इसका प्रभाव और भी बढ़ जाता है। यह वह दिन होता है जब विघ्नहर्ता गणेश अपने भक्तों के जीवन से सभी संकटों और दुखों को समाप्त कर देते हैं।
लोकमान्यता है कि इस दिन जो भी व्यक्ति व्रत रखकर गणपति बप्पा की सच्चे मन से पूजा करता है और उन्हें प्रिय वस्तुएं अर्पित करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। कहा जाता है, गणपति बप्पा जहां हैं, वहां संकट टिक ही नहीं सकता।
संकष्टी चतुर्थी 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त
साल 2025 में संकष्टी चतुर्थी का पर्व 8 नवंबर को मनाया जाएगा। यह दिन मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को पड़ रहा है। इस दिन रात्रि में चंद्रोदय दर्शन का विशेष महत्व है। इस दिन उपवास रखने वाले भक्त चंद्रोदय के बाद ही गणेश जी की पूजा और प्रसाद ग्रहण करते हैं।
संकष्टी चतुर्थी का महत्व (Sankashti Chaturthi)
संकटों से मुक्ति का प्रतीक
संकष्टी शब्द का अर्थ ही है संकटों को हरने वाली। इस दिन व्रत रखने से जीवन में आने वाले आर्थिक, मानसिक, पारिवारिक और स्वास्थ्य संबंधी संकटों से मुक्ति मिलती है।
मनोकामना पूर्ति का व्रत
जो भी भक्त इस दिन विधि-विधान से व्रत, पूजा और अर्पण करता है, उसके कार्यों में आने वाली बाधाएं समाप्त होती हैं। इस दिन गणेश जी को अर्पित की गई वस्तुएं सकारात्मक ऊर्जा और सौभाग्य को आकर्षित करती हैं।
संकष्टी चतुर्थी पर भगवान गणेश को अर्पित करें ये 5 चीजें
दुर्वा घास
गणेश जी की पूजा बिना दुर्वा घास के अधूरी मानी जाती है। शास्त्रों में कहा गया है कि भगवान गणेश ने स्वयं असुर ‘अनलासुर’ को दुर्वा से शांत किया था। इसलिए दुर्वा अर्पित करने से क्रोध, अस्थिरता और दुर्भाग्य से मुक्ति मिलती है। 21 दुर्वा के तंतु लेकर गणेश जी को अर्पित करें और मंत्र बोलें, ॐ एकदंताय नमः।
मोदक
गणपति बप्पा को मोदक सबसे प्रिय है। यह सिर्फ मिठाई नहीं, बल्कि ज्ञान और आनंद का प्रतीक है। मोदक अर्पित करने से बुद्धि तेज होती है और जीवन में आध्यात्मिक संतुलन आता है। अगर घर में बनी हुई घी और गुड़ की मोदक से गणेश जी को भोग लगाएं, तो यह और भी शुभ माना जाता है।
लाल फूल
गणेश जी को लाल रंग के फूल चढ़ाने से जीवन में ऊर्जा, सफलता और सकारात्मकता आती है। विशेष रूप से लाल गेंदा या लाल कमल के फूल से पूजा करने से कार्यक्षेत्र में आने वाली अड़चनें दूर होती हैं।
गुड़ और चना
गणेश जी को गुड़ और भुना चना अर्पित करने से घर में धन, स्वास्थ्य और सौभाग्य बढ़ता है। यह अर्पण खासकर उन लोगों के लिए लाभदायक है जो आर्थिक संकट या कर्ज से परेशान हैं। पूजा के बाद यह प्रसाद गाय या जरूरतमंद व्यक्ति को दान करना चाहिए।
सिंदूर
सिंदूर गणेश जी के शरीर का हिस्सा माना जाता है। कथाओं के अनुसार, भगवान गणेश ने स्वयं कहा था, जो भक्त मुझे सिंदूर अर्पित करेगा, मैं उसे दीर्घायु, आरोग्य और सुख दूंगा। इस दिन गणेश जी की प्रतिमा पर सिंदूर लगाकर दीपक जलाने से रोगों और भय से रक्षा होती है।
संकष्टी चतुर्थी पर व्रत और पूजा विधि
- सुबह स्नान के बाद गणेश जी की प्रतिमा को पूर्व दिशा में स्थापित करें।
- लाल कपड़ा बिछाकर दुर्वा, फूल, मोदक, और सिंदूर से पूजन करें।
- धूप, दीप और अगरबत्ती जलाएं।
- “ॐ गण गणपतये नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें।
- रात्रि में चंद्रोदय के बाद गणेश जी को प्रसाद अर्पित करें।
- चंद्रोदय के दर्शन कर व्रत का समापन करें।
संकष्टी चतुर्थी पर क्या न करें
- इस दिन चंद्र दर्शन से पहले कुछ भी न खाएं।
- किसी से विवाद, कटु वचन या झूठ बोलने से बचें।
- पूजा के समय मोबाइल या टीवी जैसी चीजों से दूरी बनाएं।
- रात्रि के समय मांस, मदिरा या तामसिक भोजन से परहेज करें।
धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व
संकष्टी चतुर्थी केवल आस्था का नहीं, बल्कि ऊर्जा संतुलन का भी दिन है। गणेश जी को बुध ग्रह का अधिपति माना गया है, और बुध हमारे बुद्धि, व्यापार, निर्णय शक्ति और संवाद कौशल का कारक है। इस दिन पूजा करने से बुध दोष, शनि की पीड़ा और राहु के अशुभ प्रभाव शांत होते हैं। यह व्रत विद्यार्थियों, व्यापारियों और नौकरीपेशा लोगों के लिए अत्यंत शुभ फलदायक है।
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