वैधृति योग जीवन में लाता है कठिनाइयां, जानें इस दौरान कौन से उपाय रहेंगे कारगर, किन कामों से रहें दूर

ज्योतिष में कई सारे योग का उल्लेख मिलता है। वैधृति योग भी इन्हीं में से एक है, जिसे अशुभ माना गया है। चलिए जान लेते हैं इस योग के नकारात्मक असर से कैसे बचा जा सकता है।
Vaidhriti Yoga

जब ग्रह नक्षत्र की चाल बदलती है तो व्यक्ति का जीवन बहुत गहरे तरीके से प्रभावित होता है। कई बार जब दो ग्रह आपस में मिलते हैं तो शुभ संयोग बनाते हैं और कई बार ऐसा भी होता है कि दो ग्रहों का मिलन हमें मुश्किल परिस्थितियों में डाल देता है। ऐसा ही एक वैधृति योग भी बनता है जो ज्योतिष शास्त्र में अशुभ माना गया है। सूर्य और चंद्रमा की युति से बनने वाला यह योग कुछ राशियों के लिए कष्टकारी साबित होता है।

23 अप्रैल से वैधृति योग शुरू हुआ है। ऊर्जा के कारक सूर्य और शांति और शीतलता के कारक चंद्रमा के मिलन से इस योग का निर्माण हुआ है। जब सूर्य और चंद्रमा के बीच एक विशेष गणितीय संबंध होता है तब इस योग का निर्माण होता है। चलिए आपको बता देते हैं कि इस योग के दौरान क्या करना शुभ है और क्या नहीं करना चाहिए।

कैसा होता है असर

ये ज्योतिष में एक अशुभ योग के तौर पर पहचाना जाता है। यह व्यक्ति के कार्यों और मन पर नकारात्मक असर डालने का काम करता है। इससे व्यक्ति की कार्य क्षमता और मानसिक स्थिति दोनों ही प्रभावित होने लगती है। कुछ राशियों के लिए चुनौतियां बढ़ाने का काम करता है।

वैधृति योग में क्या ना करें (Vaidhriti Yoga)

जब ये योग बन रहा हो तब व्यक्ति को जितना हो सके उतना यात्रा करने से दूर रहना चाहिए। इसी के साथ भाग दौड़ वाले काम संभल कर करें या फिर अगर उन्हें टाला जा सकता हो तो टाल दें। दरअसल, इस समय संकट की स्थिति बनी रहती है उसकी वजह से बचकर रहना जरूरी है। इस दौरान कोई भी महत्वपूर्ण काम शुरू नहीं किया जाता। यह योग अपने साथ बाधा और कठिनाइयां लेकर आता है इसलिए नया काम शुरू न किया जाए तो बेहतर होगा। अगर आपको किसी प्रतिष्ठान या फिर मकान में कलश स्थापना करनी है या फिर कोई शुभ काम शुरू करना है तो वैधृति योग से बचना बेहतर होगा।

क्या करें

  • इस योग के समय मंत्रों का जाप करना उचित माना गया है। आप अपने इष्ट के मंत्र से उनकी आराधना कर सकते हैं ताकि वो आप पर आने वाले संकटों को टाल दें। इंद्रसूक्त, अप्रतिरथसूक्त और मृत्युंजय मंत्र का जाप शुभ माना गया है।
  • ब्राह्मण कुंभ का स्पर्श करना इस दौरान शुभ माना जाता है। इससे बाधाओं से हमारी रक्षा होती है।
  • अगर आसपास कहीं पर नाग केसर का पेड़ उपलब्ध हो तो उसकी पूजन अवश्य करें। अगर पेड़ नहीं है तो आप इसकी सूखी लकड़ी लाकर या फिर फूल लाकर प्रणाम कर उसे दिन भर के लिए अपने पास रख सकते हैं।

डिस्क्लेमर – इस लेख में दी गई सूचनाएं सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। एमपी ब्रेकिंग इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ की सलाह लें।

Diksha Bhanupriy
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10 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव, डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में.

"पत्रकारिता का मुख्य काम है, लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को संदर्भ के साथ इस तरह रखना कि हम उसका इस्तेमाल मनुष्य की स्थिति सुधारने में कर सकें।” इसी उद्देश्य के साथ मैं पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रही हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है। मैं कॉपी राइटिंग, वेब कॉन्टेंट राइटिंग करना जानती हूं। मेरे पसंदीदा विषय दैनिक अपडेट, मनोरंजन और जीवनशैली समेत अन्य विषयों से संबंधित है। View all posts by Diksha Bhanupriy →
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