संक्रांति की तिथि को हिंदू धर्म में बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। केवल मकर संक्रांति ही नहीं आती है बल्कि सूर्य के अलग-अलग राशि में परिवर्तन के दौरान अलग अलग संक्रांति आती है। इस दिन स्नान दान और सूर्य उपासना का विशेष महत्व माना गया है।
अगर आप आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं या दुर्भाग्य से परेशान है तो वृषभ संक्रांति का दिन आपके लिए बहुत खास रहने वाला है। इस दिन स्नान करते समय बस एक विशेष उपाय करना होगा जो आपकी किस्मत चमका देगा। चलिए जान लेते हैं वृषभ संक्रांति कब है, मुहूर्त क्या है और आपको क्या उपाय करना है।
वृषभ संक्रांति तिथि और मुहूर्त
वृषभ संक्रांति 15 मई 2026 को मनाई जाने वाली है। इस दिन पुण्य काल का मुहूर्त सुबह 5:30 से 6:28 तक है। बता दें कि सूर्य के वृषभ राशि में प्रवेश को वृषभ संक्रांति के नाम से पहचाना जाता है। चलिए इस दिन उपासना कैसे करनी है यह जान लेते हैं।
कैसे करें सूर्य उपासना
वृषभ संक्रांति के दिन सूर्य देव को अर्घ्य देने के लिए तांबे के लोटे में शुद्ध जल लें। अब आपको उसमें लाल फूल, अक्षत, रोली और थोड़ा सा काला तिल मिलाना होगा। यह सभी सामग्री मिलाकर सूर्य देव को अर्घ्य दें। इस समय सूर्य मंत्र का जाप जरुर करें। इससे आपको सूर्य देव का आशीर्वाद प्राप्त होगा।
करें ये उपाय
पवित्र जल से स्नान
वृषभ संक्रांति के दिन पवित्र नदियों में स्नान करने का विशेष महत्व माना गया है। अगर आप स्नान के लिए नहीं जा पा रहे हैं तो घर पर नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं। इस दिन जो व्यक्ति गंगाजल मिले हुए पानी से नहाता है उसे पवित्र स्थल पर स्नान करने का पुण्य प्राप्त होता है।
काले तिल का उपयोग
इस दिन नहाने के पानी में काले तिल मिलाकर भी स्नान किया जा सकता है। इसे बहुत ही शुभ और पुण्यकारी माना गया है। काले तिल मिलाकर स्नान करने से व्यक्ति की आयु लंबी होती है। जीवन से सारी नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है और दरिद्रता भी खत्म होती है।
करें इन चीजों का दान
वृषभ संक्रांति के दिन जल से भरा हुआ मिट्टी का घड़ा, सत्तू, अन्न, मौसमी फल और गुड़ का दान जरूर करें। इन उपायों से सूर्य देव की कृपा प्राप्त होती है और पितरों को भी शांति मिलती है।
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