उत्तर भारत का प्रमुख लोक पर्व लोहड़ी हर साल मकर संक्रांति से एक दिन पहले पूरे उल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस वर्ष भी 13 जनवरी को घर-घर में लोहड़ी की पवित्र अग्नि जलेगी, गीत गूंजेंगे और लोग अग्नि देव को आहुति देकर सुख-समृद्धि की कामना करेंगे। यह पर्व केवल उत्सव नहीं, बल्कि प्रकृति, सूर्य और अग्नि के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर भी है।
आज भी लोग लोहड़ी मनाते तो हैं, लेकिन इसकी धार्मिक मर्यादाओं और मान्यताओं को पूरी तरह नहीं जानते। कई बार अनजाने में ऐसी वस्तुएं अग्नि में डाल दी जाती हैं, जिन्हें शास्त्रों और लोक मान्यताओं में वर्जित माना गया है। ऐसी गलतियां जीवन में आर्थिक संकट, पारिवारिक तनाव और मानसिक अशांति का कारण बन सकती हैं। इसलिए लोहड़ी की पवित्र अग्नि में क्या देना चाहिए और क्या नहीं, यह जानना बेहद जरूरी हो जाता है।
लोहड़ी पर्व का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
लोहड़ी का संबंध सीधे तौर पर अग्नि देव और सूर्य देव से जुड़ा है। यह पर्व शीत ऋतु की विदाई और सूर्य के उत्तरायण होने का संकेत देता है। मान्यता है कि सूर्य के उत्तरायण होने से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और जीवन में नई शुरुआत होती है। इसी कारण लोहड़ी को उन्नति, स्वास्थ्य और खुशहाली का प्रतीक माना गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, अग्नि देव को साक्षात देवता माना गया है, जो देवताओं और मनुष्यों के बीच संदेशवाहक होते हैं। जब हम लोहड़ी की अग्नि में शुद्ध वस्तुओं की आहुति देते हैं, तो वह हमारी प्रार्थनाओं को देवताओं तक पहुंचाती है। यही कारण है कि इस दिन दी जाने वाली हर वस्तु का अपना एक विशेष अर्थ और प्रभाव होता है।
लोहड़ी की पवित्र अग्नि में क्या डालना शुभ माना जाता है
मूंगफली और रेवड़ी भी लोहड़ी की अग्नि में डाली जाने वाली प्रमुख वस्तुएं हैं। लोक मान्यताओं के अनुसार, इनकी आहुति से घर में कभी अन्न और धन की कमी नहीं होती। यह नई फसल के स्वागत और किसान की मेहनत के सम्मान का भी प्रतीक है।
मक्का, ज्वार और गन्ना क्यों हैं लोहड़ी में खास
लोहड़ी का पर्व मूल रूप से कृषि से जुड़ा हुआ है। इसी कारण मक्का, ज्वार और गन्ना जैसे अनाज और फसलें इस पर्व का अहम हिस्सा मानी जाती हैं। लोहड़ी की पवित्र अग्नि में मक्का और ज्वार डालने से मेहनत का फल मिलने और निरंतर प्रगति का संकेत माना जाता है।
गन्ना मिठास और समृद्धि का प्रतीक है। मान्यता है कि गन्ने की आहुति देने से जीवन में मधुरता आती है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। कुछ स्थानों पर चावल भी अग्नि में अर्पित किए जाते हैं, जिन्हें पवित्रता और पूर्णता का प्रतीक माना गया है।
लोहड़ी की अग्नि में भूलकर भी न डालें ये चीजें
जैसे कुछ वस्तुएं शुभ होती हैं, वैसे ही कुछ चीजें ऐसी भी हैं जिन्हें लोहड़ी की पवित्र अग्नि में डालना वर्जित माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अग्नि देव को अपवित्र या अशुद्ध वस्तुएं अर्पित करने से नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
रबर, प्लास्टिक और केमिकल युक्त वस्तुएं आज के समय में सबसे बड़ी गलती मानी जाती हैं। कई लोग अनजाने में पुराने जूते, प्लास्टिक की चीजें या कचरा आग में डाल देते हैं। यह न केवल पर्यावरण के लिए खतरनाक है, बल्कि धार्मिक दृष्टि से भी गंभीर दोष माना गया है।
नमक को भी शुभ कार्यों की अग्नि में डालना वर्जित बताया गया है। लोक मान्यताओं के अनुसार, नमक का संबंध दरिद्रता और नजर दोष से जोड़ा जाता है। लोहड़ी की पवित्र अग्नि में नमक डालने से आर्थिक परेशानियां बढ़ सकती हैं।
जूठा भोजन और पुराने कपड़े क्यों माने जाते हैं अशुभ
लोहड़ी की अग्नि में जूठा भोजन डालना भी एक बड़ी भूल मानी जाती है। अग्नि देव को हमेशा शुद्ध और सात्विक वस्तुएं ही अर्पित की जानी चाहिए। जूठा भोजन डालने से घर की बरकत रुकने और मानसिक अशांति बढ़ने की मान्यता है।
इसके अलावा कई लोग लोहड़ी की आग में फटे या पुराने कपड़े डाल देते हैं। शास्त्रों और लोक परंपराओं में फटे-पुराने वस्त्रों को कंगाली और अभाव का प्रतीक माना गया है। ऐसी वस्तुओं की आहुति देने से जीवन में आर्थिक अस्थिरता आ सकती है।
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