ऑटो चालक के घर से 3 करोड़ कैश मिलने का मामला, PWD इंजीनियर रमेश अहिरवार और पत्नी पर FIR, दो अन्य पर भी मामला दर्ज

लोकायुक्त पुलिस की एसआईटी नकदी के स्रोत, रकम के वास्तविक मालिक और इस पूरे मामले से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।
Case ₹3 crore found at an auto-rickshaw driver home in Sagar

Case ₹3 crore found at an auto-rickshaw driver home in Sagar

सागर के चर्चित 3 करोड़ कैश बरामदगी मामले में अब लोकायुक्त कड़े एक्शन में है, लोकायुक्त पुलिस ने इस मामले में  पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर और उनकी पत्नी पर एफ आई आर दर्ज की है, लोकायुक्त ने इसी मामले में दो अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया है खबर ये भी है कि आयकर विभाग ने भी इंजीनियर अहिरवार को नोटिस भेजा है वहीं अब इस मामले में ईडी की एंट्री की भी चर्चा हो रही है ।

सागर जिले की गोपालगंज थाना पुलिस ने बीते 16 अगस्त को ऑटो चालक सौरभ अहिरवार के घर से मिले 3 करोड़ 2 लाख रुपये कैश बरामद किया था, एक ऑटो चालक के पास इतना कैश सामने आने के बाद पुलिस के चकित रह गई , पूछताछ में सौरभ ने कैश अपने रिश्तेदार पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर रमेश अहिरवार का बताया हालाँकि जब पुलिस ने रमेश अहिरवार से पूछा तो उन्होंने कैश उनका होने से इंकार कर दिया  जिसके बाद ये मामला उलझ गया।

रमेश अहिरवार और उनकी पत्नी पर एफआईआर दर्ज  

मामला एक शासकीय सेवक से जुड़ा था तो इसमें लोकायुक्त ने जाँच हाथ में ली और 5 सदस्यीय एसआईटी गठित की है जो इसकी जांच कर रही है, कुछ शुरूआती सबूतों के आधार पर लोकायुक्त ने रमेश अहिरवार, उनकी पति और दो अन्य लोगों को आरोपी बनाते हुए उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की है और कैश एक असली मालिक तक पहुँचने की कोशिश में जुट गई है।

लोकायुक्त की SIT कर रही आय के स्रोतों की पड़ताल 

लोकायुक्त एसपी दुर्गेश राठौर के मुताबिक एसआईटी रमेश अहिरवार के आय के स्रोतों , उनकी संपत्ति आदि की जाँच कर रही है लोकायुक्त ऑटो चालक के घर मिले 3 करोड़ 2 लाख रुपये कैश को भी अपने कब्जे में ले रही है,  लोकायुक्त पुलिस ये पता करने की कोशिश करेगी कि रमेश अहिरवार ने इतना कैश कहां से अर्जित किया, क्या इसके अलावा भी कहीं और कैश है, कुल मिलाकर ये मामला एक बड़े भ्रष्टाचार की तरफ इशारा कर रहा है।

Atul Saxena
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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