मंडीदीप से सागर गर्भवती महिला परिवार के साथ पैदल पहुंची, पुलिस ने की मदद

मंडीदीप से सागर गर्भवती महिला परिवार के साथ पैदल पहुंची, पुलिस ने की मदद

सागर। कोरोना वायरस के चलते 21 दिन के लॉक डाउन के दौरान सारे कामकाज ठप्प है, साथ ही आवागमन के साधन भी बंद है। ऐसे में कई लोग एक स्थान से दूसरे स्थान तक पैदल ही सफर करने को मजबूर हैं। वही एक गर्भवती महिला अपने दो बच्चों और पति के साथ भोपाल के पास मंडीदीप से सागर के लिये पैदल ही निकल पड़ी।

लॉक डाउन में सभी दिहाड़ी मजदूरों का कामकाज बंद हो गया है, इसी कारण ये परिवार पैदल ही सागर के लिये निकल पड़ा। इस परिवार में दो छोटे बच्चों के साथ एक गर्भवती महिला और उसका पति था जो अपने घर पहुंचना चाहते थे। जब ये परिवार सागर पहुंचा तो बेहाल था, इतनी दूर पैदल चलकर आने के कारण बच्चों और गर्भवती महिला की स्थिति काफी खराब थी। इस परिवार को ऐसी हालत में देखकर लोगों ने इसकी जानकारी पुलिस को दी। जानकारी मिलते ही पुलिस की महिला विशेष इकाई की टीम ने वहां पहुंचकर गर्भवती महिला को जिला अस्पताल पहुंचाया। वहां पहले उसका स्वास्थ्य प्रशिक्षण किया गया उसके बाद पुलिस ने उसके परिवार को सुरक्षित उसके गांव तक पहुंचाने की व्यवस्था की।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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