मैनेजर द्वारा लाखों का गबन, पुलिस ने दबोचा

मैनेजर द्वारा लाखों का गबन, पुलिस ने दबोचा

सतना | पुष्पराज सिंह बघेल. कम समय मे ज्यादा पैसे कमाने की अंधी होड़ में इंसान किस तरह गलत रास्ते अख्तियार कर लेता है। इसकी बानगी दिखी सतना में जहाँ एक निजी कार शो रूम के एक्सचेंज मैनेजर ने न सिर्फ कम्पनी को हेरफेरी कर लाखो रुपये का चूना लगाया, बल्कि ग्राहकों को भी ठगी का शिकार बनाया | लेकिन सतना पुलिस की सतर्कता के चलते आरोपी जल्द गिरफ्तार हो गया |जिसके पास से 10 लाख कीमत की चार कार बरामद कर ली गयी है।आरोपी को भोपाल अयोद्या नगर से गिरफ्तार कर आज सतना जेल भेज दिया है।

सतना के हुंडई शू रूम के कार एक्सचेंज मैनेजर को चोरी की गई 4 कार के साथ भोपाल से गिरफ्तार कर लिया है जो न सिर्फ कम्पनी को चुना लगा रहा था बल्कि गाड़ियां चोरी कर कम कीमत में उन्हें बेचकर ग्राहकों से ठगी को अंजाम दे रहा था ।

मामले का खुलासा तब हुआ जब हुंडई के मैनेजर पुष्पराज सिंह ने 4 मार्च को सतना के सिविल लाइन थाने में शिकायत दर्ज करवाई कि उनके एक्सचेंज मैनेजर कपंनी की 4 कार लेकर नादरत है।और मोबाइल बंद है।जिसपर सिविल लाइन थाना टी आई ने एक्सचेंज मैनेजर को साइबर एक्सपर्ट की मदत से खोजबीन शुरू की तो आरोपी दीपक शर्मा को भोपाल अयोध्या नगर से चारो गाड़ियों सहित बरामद कर लिए गए चारो गाड़ियों को बेचा जा चुका था जिसकी कुल कीमत 10 लाख थी।सतना पुलिस ने आज आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।आरोपी दीपक ने घटना को अंजाम देने के लिए पहले से ही साजिस कर रखी थी अपने फर्जी दस्तवेज पहचान पत्र के जरिये कम्पनी में बतौर एक्सचेंज मैनेजर की पहले नौकरी हासिल की और कंपनी का भरोसा जीत अपने मंसूबे को अंजाम देने लगा लेकिन अपराधी कितनी भी शातिराना अंदाज से अपराध को अंजाम दे वो कानून की पैनी  निगाह  से ज्यादा दिन बच नही सकता।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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