वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये हुई दीवानी मामले की सुनवाई, जज ने ईमेल किया फैसला

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये हुई दीवानी मामले की सुनवाई, जज ने ईमेल किया फैसला

सीहोर/अनुराग शर्मा

कोरोना महामरी के चलते पूरी शासकीय प्रक्रिया के साथ साथ प्रदेश के न्यायालयों की प्रक्रिया भी प्रभावित हुई है। अब तक प्रदेश के जिला न्यायालयों में केवल अतिआवश्यक रिमांड ड्यूटी सम्बन्धी मामलों की सुनवाई ही हो रही थी, लेकिन शनिवार को जबलपुर उच्च न्यायालय के निर्देश पर दीवानी मामलों की सुनवाई वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये प्रदेश में शुरू की गई है।

इसी के अंतर्गत सीहोर के जिला न्यायालय में लाक डाउन के दौरान वीसी के जरिये जिला एवं सत्र न्यायाधीश राज्यवर्धन गुप्ता ने पहली बार दीवानी मामले की अंतिम बहस वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये सुनी, और अपना ई-फैसला मेल से दोनों पक्षकारों को जारी किया। यह पहला अवसर था जबकि बुजुर्ग वकील 68 साल के रविन्द्र दयाल सक्सेना ने अपने घर से वीडियो कालिंग के माध्यम से अपने पक्षकार की बहस की।  इस बहस के बाद उन्होंने मीडिया से चर्चा में कहा की यह क्षण मेरी जिंदगी में अदभुत थे, जब मैंने अपने ही घर बैठकर वीसी के जरिये डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में बहस की।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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