शीतल व्यास से सुनिये एक सुंदर कविता

शीतल व्यास से सुनिये एक सुंदर कविता

सीहोर

कोरोना संकटकाल में हर तरफ नकारात्मक माहौल दिखाई दे रहा है,  लेकिन हमें हर हाल में इस नकारात्मकता से उबरना ही होगा। और इसके लिये कला व साहित्य से अच्छा कोई रास्ता नहीं। कई लोग ऐसे हैं जो इस माहौल में भी अपने भीतर की सकारात्मकता को न सिर्फ बचाए हुए है बल्कि उसे बखूबी अभिव्यक्त भी कर रहे हैं।

तो आईये आज आपकी मुलाकात कराते हैं सीहोरी की श्रीमती शीतल व्यास से, ये सुंदर कविताएं रचती हैं और आज उन्हीं से सुनिये इस कोरोना काल में सुकून देती एक कविता।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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