
मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में फसल कटाई के बाद खेतों में बचे अवशेष यानी नरवाई को जलाने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। दरअसल कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी बालागुरु के. ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत यह बड़ा प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया है। यह नया नियम 2 नवंबर से जिले में लागू कर दिया गया है, जो अगले एक महीने तक लागू रहेगा।
धान, सोयाबीन और मक्का की नरवाई जलाने पर रोक
प्रशासन द्वारा जारी किए गए आदेश के मुताबिक जिले की पूरी सीमा के अंदर किसी भी खेत में नरवाई नहीं जलाई जाएगी। किसान भाई धान, सोयाबीन, मक्का और अन्य फसलों की कटाई के बाद खेतों में बची हुई नरवाई को आग के हवाले नहीं कर सकेंगे।
प्रशासन का कहना है कि नरवाई में आग लगाने से हवा में प्रदूषण तेजी से फैलता है और जमीन के अंदर मौजूद जरूरी मित्र कीड़े भी पूरी तरह खत्म हो जाते हैं, जिससे जमीन की उपजाऊ ताकत घटने लगती है।
आग लगने से बिजली की लाइनों और आसपास के खेतों को खतरा
खेती की नरवाई में आग लगाने से केवल जमीन ही खराब नहीं होती, बल्कि आसपास की संपत्तियों और बिजली की लाइनों को भी बहुत बड़ा नुकसान पहुंचता है। हवा चलने से आग बहुत तेजी से फैलती है, जिससे पड़ोस के खेतों में खड़ी फसलें भी जलकर राख हो जाती हैं। प्रशासन ने साफ कहा है कि आज के समय में फसल के अवशेष हटाने के लिए कई आधुनिक और वैकल्पिक साधन मौजूद हैं, इसलिए किसान नरवाई में आग न लगाएं।
नरवाई जलाई तो लगेगा भारी जुर्माना
अगर कोई किसान इस आदेश का पालन नहीं करता है और खेत में आग लगाता है, तो उस पर भारी जुर्माना ठोका जाएगा। सरकार ने जमीन के रकबे के हिसाब से पर्यावरणीय मुआवजा तय कर दिया है। अगर जमीन 2 एकड़ से कम है तो 2,500 रुपये जुर्माना लगेगा, 2 से 5 एकड़ तक की जमीन पर 5,000 रुपये और 5 एकड़ से ज्यादा जमीन पर नरवाई जलाने पर 15,000 रुपये प्रति घटना का भारी जुर्माना वसूला जाएगा।
नियम तोड़ा तो दर्ज होगी एफआईआर, होगी कानूनी कार्रवाई
प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि इस आदेश का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। सीहोर जिले की पूरी राजस्व सीमा में यह नियम कड़ाई से लागू रहेगा।
अगर कोई किसान या व्यक्ति आदेश को तोड़ता है तो उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता-2023 की धारा 223 और अन्य कड़ी धाराओं के तहत दंडात्मक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
किसानों से सहयोग की अपील
कलेक्टर ने जिले के सभी किसानों से इस व्यवस्था में प्रशासन का साथ देने और सहयोग करने की अपील की है। अधिकारियों का मानना है कि इस कदम से न सिर्फ हमारे आसपास का पर्यावरण साफ और सुरक्षित रहेगा, बल्कि किसानों की खुद की जमीन की सेहत भी बची रहेगी। इसलिए सभी को नरवाई जलाने की जगह मशीनरी और दूसरे सुरक्षित तरीकों का इस्तेमाल करना चाहिए।

