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सीहोर में क्लोरीन गैस रिसाव: तीनों सिलेंडर हटाए गए, 4 ग्रामीण अस्पताल में भर्ती, कई को सांस लेने में दिक्कत

सीहोर में क्लोरीन गैस लीक होने से ग्रामीणों में हड़कंप मच गया। गैस की चपेट में आने से 8-10 लोगों की तबीयत बिगड़ी, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया।
सीहोर में क्लोरीन गैस का रिसाव, सांस लेने में दिक्कत, कई ग्रामीण अस्पताल पहुंचे

सीहोर के लसूड़िया खास गांव में काहिरी बांध के पास वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में हुए क्लोरीन गैस रिसाव की घटना के दो दिन बाद अब स्थिति को लेकर नया अपडेट सामने आया है। गैस रिसाव के बाद आंखों में जलन और सांस लेने में परेशानी की शिकायत के चलते कई लोगों को अस्पताल ले जाया गया था।

यह घटना मंगलवार रात हुई थी, जब प्लांट में रखे क्लोरीन सिलेंडरों को हटाने का काम चल रहा था। इसी दौरान आसपास गैस फैलने की बात सामने आई और लसूड़िया खास सहित आसपास के लोगों को परेशानी होने लगी। अब जबकि सिलेंडरों को प्लांट से हटा दिया गया है, लोगों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर गैस का रिसाव किस वजह से हुआ और भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए क्या इंतजाम किए जा रहे हैं।

क्लोरीन गैस लीक के बाद 8 से 10 लोग अस्पताल पहुंचे

घटना के बाद लसूड़िया खास गांव और आसपास के इलाके से करीब 8 से 10 लोग सीहोर जिला अस्पताल की इमरजेंसी में इलाज के लिए पहुंचे थे। लोगों ने आंखों में तेज जलन, घुटन और सांस लेने में परेशानी जैसी शिकायतें बताई थीं। इनमें से 4 लोगों को डॉक्टरों ने अस्पताल में भर्ती कर निगरानी में रखा। कुछ लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई।

जिला अस्पताल के आरएमओ डॉ. हरिओम गुप्ता के अनुसार, गैस के संपर्क में आए लोगों का इलाज किया गया और भर्ती मरीजों की स्थिति पर नजर रखी गई। शुरुआती जानकारी के मुताबिक किसी मरीज को गंभीर चोट नहीं आई। घटना के बाद अस्पताल पहुंचने वाले लोगों में गैस के असर को लेकर डर भी देखा गया।

हटाए तीनों क्लोरीन सिलेंडर

क्लोरीन गैस लीक की घटना के बाद सबसे अहम कार्रवाई प्लांट में रखे सिलेंडरों को हटाने को लेकर हुई। सीहोर नगर पालिका के सीएमओ सुधीर सिंह के अनुसार, ग्रासिम कंपनी नागदा की टेक्निकल टीम ने तीनों सिलेंडरों को सावधानीपूर्वक ट्रक में रखकर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से बाहर भेज दिया है।

सिलेंडरों को हटाने का काम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि गैस रिसाव के बाद आसपास रहने वाले ग्रामीणों में दोबारा ऐसी घटना को लेकर चिंता बनी हुई थी। अब सिलेंडर हटाए जाने के बाद तत्काल खतरे की स्थिति कम होने की बात कही जा रही है। हालांकि, रिसाव की असली वजह और जिस प्रक्रिया के दौरान गैस बाहर आई, उसे लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होना अभी जरूरी है।

ग्रामीणों और अधिकारियों के दावों में अंतर

घटना को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और अधिकारियों की बातों में अंतर भी सामने आया है। ग्रामीणों का दावा है कि प्लांट के आसपास गैस का असर महसूस हुआ और कुछ लोगों की तबीयत अचानक बिगड़ी। कुछ स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि सिलेंडर से गैस निकालने की प्रक्रिया के दौरान ही आसपास के इलाके में क्लोरीन का असर पहुंचा।

वहीं नगर पालिका की ओर से बताया गया कि टेक्निकल टीम ने सिलेंडरों को सुरक्षित तरीके से हटाने की कार्रवाई की है। ऐसे में क्लोरीन गैस लीक की घटना की पूरी वजह को लेकर अभी कई सवाल बने हुए हैं। खासकर यह जानना जरूरी है कि गैस किस जगह से लीक हुई, कितनी मात्रा में बाहर निकली और आसपास के लोगों तक उसका असर कैसे पहुंचा।

क्लोरीन गैस रिसाव का असर और बचाव

क्लोरीन गैस का रिसाव होने पर सबसे पहले आंखों में जलन, खांसी, सांस लेने में परेशानी, गले में जलन और घुटन जैसी समस्या हो सकती है। ऐसी स्थिति में लोगों को तुरंत गैस वाले इलाके से दूर खुले और सुरक्षित स्थान पर चले जाना चाहिए।

आंखों में जलन हो तो साफ पानी से आंखें धोना चाहिए और सांस लेने में ज्यादा परेशानी होने पर तुरंत अस्पताल पहुंचना चाहिए। गैस के संपर्क में आए कपड़ों को बदलकर प्रभावित हिस्से को पानी से साफ करना भी जरूरी है।

Bhawna Choubey
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