सीहोर जिले के भैरुंदा क्षेत्र में अवैध रेत परिवहन को लेकर सोमवार को बड़ा विवाद सामने आया है। दरअसल ग्राम छापरी से निमोटा, बबलीखेड़ा और सनकोटा को जोड़ने वाले ग्रामीण मार्ग पर ग्रामीणों ने रेत से भरे ट्रैक्टर-ट्रॉली को रोक दिया। इसी दौरान चालक और ग्रामीणों के बीच तीखी बहस हुई, जो देखते ही देखते हाथापाई में बदल गई। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इसके बाद प्रशासन मौके पर पहुंचा और बिना रॉयल्टी रेत ले जा रहे तीन ट्रैक्टर-ट्रॉली जब्त कर लिए।
दरअसल ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। उनका आरोप है कि लंबे समय से इस कच्चे रास्ते का इस्तेमाल अवैध रेत परिवहन के लिए किया जा रहा है। रोजाना दर्जनों ट्रैक्टर इसी रास्ते से गुजरते हैं, जिससे सड़कें खराब हो रही हैं और गांव के लोगों की परेशानी लगातार बढ़ रही है। ग्रामीणों का दावा है कि कई बार शिकायत के बावजूद स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया।
अवैध रेत परिवहन से ग्रामीणों की बढ़ी मुश्किलें
स्थानीय लोगों का कहना है कि भारी ट्रैक्टर-ट्रॉली की लगातार आवाजाही से गांव की सड़कें पूरी तरह खराब हो चुकी हैं। बारिश के दिनों में यही रास्ते कीचड़ में बदल जाते हैं, जिससे बच्चों का स्कूल पहुंचना और मरीजों को अस्पताल ले जाना मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों का आरोप है कि मुख्य सड़कों पर निगरानी होने के कारण रेत माफिया जानबूझकर गांव के अंदर से निकलने वाले रास्तों का इस्तेमाल करते हैं।
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि पहले भी एक रेत से भरा ट्रैक्टर अनियंत्रित होकर गांव की दुकान में घुस गया था। इसके बावजूद परिवहन का सिलसिला नहीं रुका। लोगों का कहना है कि बिना रॉयल्टी रेत ले जाने से सरकार को राजस्व का नुकसान तो हो ही रहा है, साथ ही ग्रामीणों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ रही है। उनका आरोप है कि कई ट्रैक्टर चालकों के पास जरूरी दस्तावेज और वैध ड्राइविंग लाइसेंस तक नहीं होते, फिर भी वे खुलेआम वाहन चला रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से नियमित निगरानी और सख्त कार्रवाई की मांग की है।
प्रशासन की कार्रवाई और जांच पर टिकी नजर
घटना की सूचना मिलने के बाद नायब तहसीलदार और प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया और बिना रॉयल्टी रेत का परिवहन कर रहे तीन ट्रैक्टर-ट्रॉली जब्त कर लाड़कुई चौकी में खड़ा कराया। प्रशासन का कहना है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और नियमों के तहत आगे की कार्रवाई होगी।
वहीं, ग्रामीणों ने प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि कार्रवाई की जानकारी पहले ही अवैध रेत परिवहन करने वालों तक पहुंच जाती है। कुछ ग्रामीणों का दावा है कि व्हाट्सएप ग्रुपों के जरिए अधिकारियों की गतिविधियों की सूचना साझा की जाती है, हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। दूसरी ओर, प्रशासन ने ऐसे आरोपों की जांच की बात कही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अवैध खनन और परिवहन पर प्रभावी रोक तभी संभव है, जब लगातार निगरानी, तकनीकी ट्रैकिंग और नियमित जांच को सख्ती से लागू किया जाए। फिलहाल सीहोर का यह मामला एक बार फिर अवैध रेत कारोबार और ग्रामीण इलाकों में कानून व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर रहा है।






