खाकी ने बना दी जोड़ी : थाने में हुई शादी, पुलिस वाले बने बाराती, जानिये क्या है कहानी

खाकी ने बना दी जोड़ी  : थाने में हुई शादी, पुलिस वाले बने बाराती, जानिये क्या है कहानी

सिवनी, डेस्क रिपोर्ट| मध्य प्रदेश (Madhyapradesh) के सिवनी (Seoni) जिले में एक अनोखा मामला सामने आया है| यहां हुई एक अनोखी शादी, इस शादी किसी मंडप या मंदिर में नहीं बल्कि पुलिस थाने (Police Station) में हुई| पुलिसवाले ही घराती और बाराती बने| ये एक प्रेमी जोड़े की शादी थी, जिनके परिवार वाले इस रिश्ते के लिए तैयार नहीं थे| पुलिस ने सिर्फ इनकी शादी कराई, बल्कि दो परिवारों को भी मिला दिया|

दरअसल, बंडोल थाने अंतर्गत सारसडोल गांव के रहने वाला युवक शेष राम बरमैया और बलारपुर गांव निवासी युवती प्रार्थना बरमैया का एक दूसरे के साथ काफी समय से प्रेम प्रसंग चल रहा था| लेकिन यह रिश्ता दोनों ही परिवार को मंजूर नहीं था| लड़के के कम पड़े लिखे होने के कारण लड़की के परिवार वालों ने लड़के का रिश्ता ठुकरा दिया था| लेकिन दोनों युवक और युवती रिश्ते में बांधना चाहते थे| मामला थाने तक जा पहुंचा|

हफ्ते भर पहले प्रेमिका परिवार वालों के खिलाफ जाते हुए लड़के के पास चली गई थी। इसके बाद लड़की के पिता ने बंडोल थाने पहुंचकर युवक के खिलाफ शिकायत दर्ज करा दी थी। बंडोल थाना प्रभारी दिलीप पंचेश्वर ने मामले को समझ कर दोनों परिवार के लोगों को थाने में बुलाया और समझाया|

इसके बाद दोनों परिवार की सहमति पर थाना परिसर स्थित मंदिर में विवाह सम्पन्न कराया गया। इसके अलावा इस विवाह कार्यक्रम में दौरान थाने का पूरा स्टाफ बाराती बनकर परिवार वालों के साथ मौके पर मौजूद रहा। इस तरह दो दिलों और दो परिवारों को मिलाने में पुलिस ने बड़ी भूमिका निभाई|

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews