मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज शाजापुर जिले के रंथभंवर गांव पहुंचे जहां उन्होंने कृष्णमृगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के लिए चलाए जा रहे रेस्क्यू अभियान के दूसरे चरण का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने वन विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारियों से अभियान की प्रगति की जानकारी ली और बोमा पद्धति के जरिए कृष्णमृगों को पकड़ने की प्रक्रिया देखी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ किसानों की फसलों को बचाना भी जरूरी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि मध्यप्रदेश में इस परियोजना को मिली सफलता को देखते हुए देश के दूसरे राज्य भी इसे अपनाएंगे।
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मुख्यमंत्री ने लिया जायजा
सीएम मोहन यादव ने कहा कि देश में किसान कल्याण वर्ष मनाया जा रहा है। ऐसे में किसानों की समस्याओं का समाधान करना और वन्यजीवों की रक्षा सुनिश्चित करना..दोनों महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने बताया कि अभियान में अब तक 1236 से अधिक कृष्णमृगों को पकड़ा जा चुका है। प्रदेश सरकार का प्रयास है कि वन्यजीवों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए ताकि उनकी सुरक्षा के साथ खेती-किसानी पर पड़ने वाले असर को भी कम किया जा सके।
दो हजार कृष्णमृगों के स्थानांतरण का लक्ष्य
शाजापुर और शुजालपुर क्षेत्र में कृष्णमृगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए यह विशेष अभियान 9 अक्टूबर से चलाया जा रहा है। इसके दूसरे चरण में कुल दो हजार कृष्णमृगों को स्थानांतरित करने का लक्ष्य रखा गया है। ये अभियान 31 अक्टूबर तक चलाया जाएगा। अभियान के दौरान शाजापुर, शुजालपुर और कालापीपल सहित आसपास के क्षेत्रों में उन स्थानों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है जहां कृष्णमृगों की मौजूदगी के कारण किसानों को फसलों के नुकसान की शिकायतें मिलती रही हैं
इससे पहले भी शाजापुर क्षेत्र में इसी तरह का अभियान चलाया गया था। पिछले वर्ष की कार्रवाई में 846 कृष्णमृगों और 67 नीलगायों सहित कुल 913 वन्यजीवों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया था। पहले चरण के अनुभवों के आधार पर इस बार अभियान का दायरा बढ़ाया गया है। वन विभाग के साथ अन्य संबंधित विभागों की टीमें भी इस काम में जुटी हैं।
किसानों की फसल बचाना बड़ी चुनौती
शाजापुर और आसपास के कृषि क्षेत्रों में कृष्णमृगों की मौजूदगी लंबे समय से किसानों के लिए चिंता का विषय रही है। खेतों में पहुंचने वाले ये वन्यजीव खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। दूसरी ओर, कृष्णमृग वन्यजीव संरक्षण भी महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में चुनौती यह है कि किसानों को राहत मिले और वन्यजीवों की सुरक्षा भी बनी रहे।
इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए वन विभाग ने कृष्णमृगों को पकड़कर उपयुक्त वन क्षेत्रों में स्थानांतरित करने की योजना बनाई है। अभियान का उद्देश्य मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करना और वन्यजीवों के लिए सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना है। रेस्क्यू अभियान को व्यवस्थित तरीके से पूरा करने के लिए वन विभाग, जिला प्रशासन और अन्य संबंधित विभागों के कर्मचारी तैनात हैं।
