MP Breaking News

मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे अतिथि शिक्षक, शाजापुर में निकाली अनोखी अर्थी यात्रा

Written by:Bhawna Choubey
Published:
शाजापुर में अतिथि शिक्षकों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर अनोखा विरोध प्रदर्शन किया। नियमितीकरण और अन्य मांगों के समर्थन में शिक्षकों ने अर्थी यात्रा निकाली। हाथों में तख्तियां लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अतिथि शिक्षकों ने जल्द मांगें पूरी करने की मांग की

शाजापुर में अतिथि शिक्षकों का गुस्सा अब सड़क पर दिखाई देने लगा है। नियमितीकरण, नौकरी की सुरक्षा और समान काम के लिए समान वेतन की मांग को लेकर सैकड़ों शिक्षकों ने रविवार को अनोखे तरीके से विरोध जताया। शिक्षकों ने अपनी ही अर्थी यात्रा निकालकर सरकार का ध्यान खींचा।

टंकी चौराहे से शुरू हुई यह यात्रा शहर के अलग-अलग रास्तों से होते हुए जिला शिक्षा विभाग कार्यालय पहुंची। हाथों में मांगों वाली तख्तियां लेकर शिक्षकों ने नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान कुछ सरकारी आदेशों की प्रतियां भी जलाई गईं। शिक्षकों का कहना है कि लंबे समय से सेवा देने के बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया जा रहा है।

शाजापुर में अतिथि शिक्षकों ने निकाली अर्थी यात्रा

शाजापुर में अतिथि शिक्षकों का प्रदर्शन रविवार को उस समय चर्चा में आ गया, जब बड़ी संख्या में गेस्ट टीचर्स अपनी ही अर्थी लेकर सड़क पर उतर गए। यह अर्थी यात्रा किसी व्यक्ति की मौत के बाद नहीं, बल्कि अपनी मांगों की ओर सरकार का ध्यान खींचने के लिए निकाली गई थी। शिक्षकों ने इसे अपने भविष्य और नौकरी की असुरक्षा का प्रतीक बताया।

यात्रा टंकी चौराहे से शुरू हुई। इसके बाद शिक्षक शहर के अलग-अलग प्रमुख रास्तों से होते हुए जिला शिक्षा विभाग यानी DEO कार्यालय पहुंचे। इस दौरान उनके हाथों में कई तरह की तख्तियां थीं। इन पर नियमितीकरण, नौकरी की सुरक्षा और समान काम के लिए समान वेतन जैसी मांगें लिखी थीं। शिक्षक लगातार नारे लगाते हुए सरकार से अपनी मांगों पर जल्द फैसला लेने की अपील कर रहे थे।

नियमितीकरण और नौकरी की सुरक्षा बनी मुख्य मांग

अतिथि शिक्षकों का कहना है कि वे लंबे समय से सरकारी स्कूलों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। स्कूलों में शिक्षकों की कमी होने पर अतिथि शिक्षक बच्चों की पढ़ाई को जारी रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके बावजूद उन्हें स्थायी नौकरी जैसी सुरक्षा नहीं मिलती।

प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों की सबसे बड़ी मांग नियमितीकरण की है। उनका कहना है कि लंबे समय से काम करने वाले अतिथि शिक्षकों के भविष्य को लेकर सरकार को स्पष्ट फैसला लेना चाहिए। इसके साथ ही नौकरी की सुरक्षा और समान काम के लिए समान वेतन की मांग भी प्रमुख रूप से उठाई गई।

जिला शिक्षा विभाग कार्यालय पहुंचकर जताया विरोध

अर्थी यात्रा के जिला शिक्षा विभाग कार्यालय पहुंचने के बाद शिक्षकों ने वहां भी प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर नारे लगाए और अधिकारियों के सामने अपनी बात रखी। इस दौरान कुछ सरकारी आदेशों की प्रतियां जलाकर भी विरोध दर्ज कराया गया।

शिक्षकों का आरोप है कि पहले उनकी मांगों को लेकर जो उम्मीदें बनी थीं, बाद में जारी कुछ आदेशों से वे निराश हुए हैं। इसी नाराजगी को दिखाने के लिए उन्होंने आदेशों की प्रतियां जलाकर अपना विरोध जताया।

गेस्ट टीचर्स एसोसिएशन ने सरकार पर उठाए सवाल

गेस्ट टीचर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष आशीष शर्मा ने प्रदर्शन के दौरान अतिथि शिक्षकों की समस्याओं को सामने रखा। उनका कहना है कि अतिथि शिक्षक लंबे समय से स्कूलों में सेवाएं दे रहे हैं और शिक्षा व्यवस्था को चलाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।

उन्होंने कहा कि अतिथि शिक्षक लगातार अपनी मांगों को लेकर प्रशासन और सरकार का ध्यान खींचते रहे हैं। इसके बावजूद अब तक उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो सका है। इसी कारण इस बार विरोध का तरीका अलग रखा गया और अर्थी यात्रा निकाली गई।

आगर मालवा में भी अतिथि शिक्षकों का प्रदर्शन

अतिथि शिक्षकों का विरोध केवल शाजापुर तक सीमित नहीं रहा। आगर मालवा में भी गेस्ट टीचर्स ने अपनी मांगों को लेकर अनोखा प्रदर्शन किया। यहां जिला मुख्यालय पर अतिथि शिक्षकों ने प्रतीकात्मक अर्थी यात्रा निकालकर सरकार के खिलाफ अपना विरोध जताया।

आगर मालवा में निकाली गई अर्थी पर अतिथि शिक्षकों की मांगों से जुड़ी तख्तियां लगाई गई थीं। शिक्षक नारे लगाते हुए आगे बढ़े। प्रदर्शन के दौरान डीजे भी बजाया गया, जिससे लोगों का ध्यान इस विरोध प्रदर्शन की ओर गया।

लंबे समय से स्कूलों में दे रहे सेवाएं

अतिथि शिक्षक सरकारी स्कूलों में अलग-अलग विषयों और कक्षाओं में पढ़ाने का काम करते हैं। कई जगह शिक्षकों की कमी होने पर इनकी सेवाओं से स्कूलों में पढ़ाई का काम चलता है। ऐसे में अतिथि शिक्षक खुद को शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं।

प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों का कहना है कि जब उनसे स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी ली जाती है तो उनके भविष्य को लेकर भी सरकार को स्थायी व्यवस्था करनी चाहिए। उनका तर्क है कि बार-बार नौकरी को लेकर असमंजस की स्थिति रहने से शिक्षक भी परेशान होते हैं।

Bhawna Choubey
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि सच को जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ समाज तक पहुंचाने का माध्यम है। तथ्यों की पड़ताल, महत्वपूर्ण मुद्दों को समझना और निष्पक्ष खबरों के जरिए लोगों की आवाज़ बनना मेरी पत्रकारिता की पहचान है। View all posts by Bhawna Choubey
Follow Us :GoogleNews
मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे अतिथि शिक्षक, शाजापुर में निकाली अनोखी अर्थी यात्रा