मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले के शुजालपुर के सिविल अस्पताल में शनिवार को एक ऐसी घटना हुई, जिसने अस्पताल में मौजूद मरीजों और उनके परिजनों को डरा दिया। अस्पताल की लिफ्ट अचानक बीच में रुक गई और उसके अंदर 18 महीने की एक मासूम बच्ची, दो महिलाएं और एक पुरुष फंस गए।
करीब दो घंटे तक चारों लोग लिफ्ट के अंदर ही रहे। राहत की बात यह रही कि आखिरकार उन्हें सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया और कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। जिस लिफ्ट का इस्तेमाल रोज गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और मरीजों को एक मंजिल से दूसरी मंजिल तक ले जाने के लिए किया जाता है, उसी लिफ्ट का लंबे समय से सही तरीके से रखरखाव नहीं किया गया।
लिफ्ट में कैसे फंसे 4 लोग?
शनिवार दोपहर करीब 12:15 बजे शुजालपुर मंडी स्थित सिविल अस्पताल की लिफ्ट अचानक तकनीकी खराबी के कारण बीच में ही रुक गई। उस समय लिफ्ट के अंदर निशाना गांव के रहने वाले चंद्रपाल सिंह सिसोदिया, उनकी पत्नी किरण, उनकी 18 महीने की बेटी प्रिशा और आशा कार्यकर्ता राजकुंवर मौजूद थीं।
लिफ्ट बंद होते ही अंदर मौजूद लोग घबरा गए। छोटी बच्ची के साथ बंद जगह में फंसना परिवार के लिए बेहद मुश्किल स्थिति बन गया। अस्पताल स्टाफ ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया, लेकिन तकनीकी मदद तुरंत उपलब्ध नहीं हो सकी। करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद लिफ्ट का दरवाजा खोला गया और सभी चारों लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
दो घंटे तक क्यों चलता रहा राहत कार्य?
इस घटना में सबसे बड़ा सवाल यह उठा कि लोगों को बाहर निकालने में इतना समय क्यों लगा। जानकारी के अनुसार अस्पताल में लिफ्ट की देखभाल के लिए कोई स्थायी ऑपरेटर या तकनीकी कर्मचारी मौजूद नहीं था। जिस तकनीशियन को बुलाया गया था, वह उस समय कालीसिंध क्षेत्र में किसी दूसरे काम पर गया हुआ था। उसे वहां से सीधे शुजालपुर पहुंचना पड़ा। इसी वजह से राहत कार्य में देरी हुई और लिफ्ट के अंदर फंसे लोगों को करीब दो घंटे तक इंतजार करना पड़ा। हालांकि अस्पताल कर्मचारियों ने लगातार लिफ्ट के अंदर फंसे लोगों से बातचीत जारी रखी, जिससे उनका हौसला बना रहा और घबराहट कम हुई।
अस्पताल की लिफ्ट पहले भी बन चुकी है परेशानी
स्थानीय लोगों के अनुसार यह लिफ्ट लगभग दस साल पहले बनी अस्पताल की इमारत का हिस्सा है। बताया जा रहा है कि रखरखाव की कमी के कारण यह लिफ्ट पहले भी कई बार खराब हो चुकी है। कई बार इसे लंबे समय तक बंद भी रखना पड़ा था। इसके बावजूद नियमित मेंटेनेंस और स्थायी तकनीकी व्यवस्था नहीं की गई।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पताल जैसी जगहों पर लिफ्ट सिर्फ सुविधा नहीं बल्कि जरूरी सेवा होती है। यहां रोज मरीज, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और स्ट्रेचर तक इसी लिफ्ट का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में किसी भी तरह की लापरवाही गंभीर हादसे का कारण बन सकती है।
SDM ने दिए सख्त निर्देश
घटना की सूचना मिलते ही शुजालपुर की एसडीएम अंकिता पाटकर अस्पताल पहुंचीं और पूरे मामले की जानकारी ली। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन को निर्देश दिए कि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा नहीं होनी चाहिए। इसके लिए लिफ्ट की नियमित जांच, समय पर मेंटेनेंस और सभी सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाए।






