10 वर्षीय प्रियांश मेवाड़ा की हत्या ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक, गुटखा-पाउच लाने को लेकर हुए विवाद के बाद इस वारदात को अंजाम दिया गया।
प्रियांश गुरुवार शाम घर के पास खेल रहा था, लेकिन देर रात तक वापस नहीं लौटा। परिजनों ने पहले अपने स्तर पर उसकी तलाश की और बाद में पुलिस को सूचना दी। शिकायत मिलते ही पुलिस ने गुमशुदगी का मामला दर्ज कर गांव और आसपास के इलाकों में खोजबीन शुरू कर दी।
पूछताछ से सामने आई हत्या की कहानी
पुलिस जांच के दौरान आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई। इसमें प्रियांश आखिरी बार एक नाबालिग के साथ जाता हुआ दिखाई दिया। इसके बाद पुलिस ने उस किशोर को हिरासत में लेकर पूछताछ की। अधिकारियों के मुताबिक, पूछताछ में उसने घटना से जुड़ी जानकारी दी। पुलिस का कहना है कि शुरुआती पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी किशोर ने प्रियांश से गुटखा-पाउच मंगाया था। बच्चा सामान लेकर आया, लेकिन उसने आगे से इस तरह की चीजें लाने से साफ इनकार कर दिया और ऐसी मांग दोबारा नहीं करने की बात कही।
पुलिस के अनुसार, इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ। जांच में यह भी सामने आया कि विवाद के दौरान प्रियांश वहां से भागकर पास स्थित एमपीईबी के पुराने भवन की ओर चला गया। आरोप है कि किशोर भी उसके पीछे पहुंचा और वहीं उस पर धारदार हथियार से हमला कर दिया। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि घटना की हर कड़ी की वैज्ञानिक और कानूनी तरीके से जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक साक्ष्य और अन्य तकनीकी पहलुओं को भी जांच में शामिल किया गया है।
परिजनों का प्रदर्शन
बच्चे का शव मिलने के बाद गांव में भारी आक्रोश फैल गया। बड़ी संख्या में ग्रामीण और परिजन सड़क पर उतर आए और चक्काजाम कर पुलिस प्रशासन से त्वरित और सख्त कार्रवाई की मांग करने लगे। लोगों का कहना था कि ऐसी घटनाएं समाज के लिए बेहद चिंता का विषय हैं। पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर लोगों को समझाया और निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया, जिसके बाद स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हुई।
यह घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि समाज के सामने कई गंभीर सवाल भी छोड़ गई है। कम उम्र के बच्चों और किशोरों तक तंबाकू और गुटखा जैसे उत्पादों की पहुंच, उनके व्यवहार पर पड़ने वाला असर और अभिभावकों की निगरानी जैसे मुद्दों पर फिर चर्चा शुरू हो गई है।






